Saturday, September 8, 2012

आप्शन



विदा ही एकमात्र आप्शन है
उन सभी के प्रेम के लिए
जो मोहब्बत तो करते हैं ...
पर......
नैतिकता को छोड़ नहीं पाते .

वो भले दुखी हों ,पर
सारा समाज सुखी है..कि
जिनके मन मिले...थे
उनके शरीर को मिलने नहीं दिया.
वो खडा रहा
पहरेदार बन कर
जब भी कभी
मेरे हाथों ने ,होठों ने
तुम्हें छूना चाहा .

सारे संस्कारों की दुहाई दे दी गयी
कि वो चाहते रहे
एक दूसरे को ,हमेशा
पर...मिलन की कोई सूरत न हो.

प्यार ...बस तब तक प्यार है
जब तक ..अलग अलग बिस्तरों पे
हम एक दूसरे को याद करते -करते
अपनी शराफत ..अपने मूल्यों को
साथ लेकर सोते रहे,रोते रहे ....

सारी मर्यादाएं ,वर्जनाएं
साथ साथ चलती रहीं
मेरी तेरी उदासीनता के साथ
और कहती रहीं...
ज्यादा अच्छे लोगों को ..कुछ भी हो
प्रेम ना होने पाए कभी."

24 comments:

  1. लीक से अलग घुमड़ते विचारों पर केन्द्रित भाव

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    1. ह्म्म्म...लीक से हटकर तो निस्संदेह है

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  2. बेहद खूबसूरत..!!

    ऐसा ही तो होता आया है और जब ये हमारे साथ हो जाता है, तब भी हम अपनी अगली पीढ़ी के साथ वैसा ही करते हैं..!!! आखिर क्यूँ..?? अगर ऐसा नहीं करते तो ये प्रथा कबकि समाप्त हो गयी होती..और आज ये प्रश्न ही नहीं आता..!!

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    1. क्यूंकि अधिकतर लोग बिना कोई सवाल किये सब मान लेने को तैयार हो जाते हैं

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  3. सच कहा...
    संस्कारों की जकडन हो तो बेहतर है के प्यार ही न हो...
    सुन्दर रचना निधि जी.

    अनु

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  4. सारी मर्यादाएं ,वर्जनाएं
    साथ साथ चलती रहीं
    मेरी तेरी उदासीनता के साथ
    और कहती रहीं...
    ज्यादा अच्छे लोगों को ..कुछ भी हो
    प्रेम ना होने पाए कभी."

    यह सिलसिला न जाने कब तक चलेगा ...

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  5. सचमुच सिर्फ यही ऑप्शन बचता है फिर "कुछ भी हो
    प्रेम ना होने पाए कभी." सुन्दर रचना

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    1. प्रेम ना हो यही सबसे सही ऑप्शनहै

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  6. बहुत सुंदर
    सच्चाई से रूबरू कराती हुई

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  7. https://www.facebook.com/bharat.tiwari/posts/340980585996518
    प्यार ...बस तब तक प्यार है
    जब तक ..अलग अलग बिस्तरों पे
    हम एक दूसरे को याद करते -करते
    अपनी शराफत ..अपने मूल्यों को
    साथ लेकर सोते रहे,रोते रहे ....
    ............................... बेहद उम्दा फेसबुक पर शेयर किया है आशा करता हूँ बुरा नहीं मानेंगी ...
    सादर

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    1. साझा करने के लिए,आभार.

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  8. बेबाक लिखा सच.

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    1. सच हो तो बेबाकी आ ही जाती है

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  9. मन से रूह तक पंहुंचती बेहद स्पर्शी रचना....

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  10. आपने तो शब्दों से जादू बिखेरा है.....बहुत ही सरलता से कहा आपने....गम्भीर बात को....बेमिसाल...रचना है।

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    1. पसंद करने और सराहने के लिए,शुक्रिया!

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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