तुम ,
कुछ कहो न कहो..
कुछ लिखो न लिखो
मुझे वो सारे हुनर आते हैं
जिनसे
तुम्हारी आँखों से होकर
मैं मन तक पहुँच जाती हूँ
और सब अनकहा ...सुन आती हूँ.
सब अनलिखा ...पढ़ आती हूँ .
अब तो कभी नहीं कहोगे न ..
कि "कुछ नहीं हुआ "
"पता नहीं "कह कर नहीं टालोगे
या ...बस,"ऐसे ही "कह कर बहलाओगे नहीं .
तुम्हारी आँखों से होकर
ReplyDeleteमैं मन तक पहुँच जाती हूँ
और सब अनकहा ...सुन आती हूँ.
सब अनलिखा ...पढ़ आती हूँ .
बहुत बढ़िया बेहतरीन प्रस्तुति,,,,
RECENT POST,तुम जो मुस्करा दो,
शुक्रिया!!
Deleteखूबसूरती से लिखे एहसास
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद!
Deleteबहुत ही बढ़िया।
ReplyDeleteसादर
शुक्रिया!!
Deletekhoobsurat ehsas....
ReplyDeleteतहे दिल से शुक्रिया !!
Deletebeautiful emotions :)
ReplyDeleteथैंक्स!!
Deleteआप रुलाते बहुत हो निधि !
ReplyDeleteलीजिए मुस्कुराईये:-))))))
DeleteThis comment has been removed by a blog administrator.
ReplyDelete