सीधी सी बात यही है कि..
बस,तुम आओ....
चले आओ...मेरे पास.
कोई मौसम हो...
उससे क्या फर्क पड़ता है ?
मेरे मन के सारे मौसमों पे
तो बरसों बाद भी
एक बस तेरा ही कब्जा है .
मौसम का आना जाना
उससे मुझे क्या लेना देना
तुम्हारा आना....मेरे लिए
है बसंत का आना .
और प्रतीक्षा मत कराओ
कबसे ठहरा है बसंत उस मोड पे,
जहां मुड गए थे तुम मुझे छोड़ के .
bahut sundar ....
ReplyDeleteshubhkamnayen....
शुभकामनाओं की ज़रूरत है:-)
Deleteसीधी सी बात......सच्ची ,समझ आये उसे तब न !!!!
ReplyDeleteप्यारा सा आग्रह निधि...
अनु
समझ होती तो जाता ही यूँ...
Deleteयाद तुम्हारी आ रही,मौसम देता झकझोर
ReplyDeleteलौट आओ अब प्रिये,नही इश्क पर जोर,,,,
RECENT P0ST फिर मिलने का
हार्दिक आभार!
Deleteवाह..
ReplyDeleteबस..अब आ भी जाओ...!!
ह्म्म्म...देखो,कब आते हैं
Deleteतुम्हारा आना....मेरे लिए
ReplyDeleteहै बसंत का आना .
और प्रतीक्षा मत कराओ
सचमुच जब वो आयें तभी बसंत है... आग्रह इतना प्यारा हो तो उन्हें आना ही है.... शुभकामनायें
आमीन!!
Deleteइतने प्यार से बुलाएँगे तो
ReplyDeleteजरुर आ जायेंगे..
बहुत सुन्दर..
प्यारी रचना..मनभावन..
:-)
थैंक्स....आ जाना चाहिए,न?
Deleteवाह निधि वाह , सुबह-सुबह इतनी प्यारी रचना ....
ReplyDeleteसच कहा तुमने वहीँ ठहरे हैं सारे ही मौसम जहाँ तुम......
इंदु..................थैंक्स ,दोस्त.
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ReplyDeleteअन्तरमन के भाव मुखारित हुए।
ऐसा लिखती हैं आप भाव हिलोरे लेने लगते है।
बहुत-बहुत शुक्रिया!बड़े दिन बाद ब्लॉग की ओर रुख किया .
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