ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
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Tuesday, February 11, 2014
बसंत का मौसम
मिलना
बिछड़ जाना
ज़िन्दगी में सब बदल जाना।
मौसम आये ...गुज़रते रहे सालों साल
पर जो नहीं बदला
वो तेरा मेरा हाल
कुछ है कि पीले पत्तों से लिपटा पतझड़
तेरे ज़र्द चेहरे पर ठहर गया है
और वो गीला सा सावन
मेरी आँखों में रुक गया है
चलो,
इन दोनों मौसमों को विदा कर दें
मिलें हम दोबारा
बसंत हमारा इंतज़ार कर रहा है
न जाने कब से
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Tuesday, November 12, 2013
प्यार में हो न सकूंगी
तुम जबसे नहीं ज़िंदगी में
हरेक सुबह ऎसी है
जैसे कई दिन की छुट्टी के बाद काम पर जाना .
तुम्हारे बग़ैर ..
हरेक सड़क ,बस...वन वे
कुछ नहीं जिससे वापस आया जाये
और अगर लौटा भी जाए किसी तरह
तो ,सवाल यह की आखिर किसके लिए .
तुम्हारे बिना
नीला या लाल
गुलाबी या काली
किसी भी स्याही से लिखा,"मैं तुमसे प्यार करती हूँ "
आपने मायने खो देता है .
तुम नहीं हो जो ..
...तो,हमेशा का मतलब
बहुत-बहुत ज़्यादा लंबा अरसा
नहीं हो सकेगा,कभी.
नहीं होगे जब तुम करीब
तो बसंत से रहेगी दूरी
और यह स्याह सर्द सी ज़िंदगी
मेरे आगे अंतहीन खिंचती जायेंगी .
पता है,तुम्हें
यह सब क्यूँकर हुआ
क्यूंकि,तुम बिन ..
मैं प्यार में हो न सकूंगी
कुछ महसूस कर न सकूंगी.
Saturday, March 16, 2013
रंगीला बसंत

तेरी यादों की बालियाँ
पक गयी हैं
लहलहाने लगी हैं.
आम पर लद रही है बौर
जैसे संग है मेरा दर्द
मुझे महकाता हुआ .
अलसी के फूलों ने
ले लिया है नीलापन
मेरी हर अंदरूनी चोट से.
सरसों ने उधारी पर लिया है
थोड़ा पीलापन
मेरे ज़र्द चेहरे से
पर ...मज़े की बात है कि
इस सब के बीच में ही
फूल रहा है हमारा प्यार
पलाश सा दहकता हुआ लाल .
कितना रंगीन होता है न बसंत...!!
Tuesday, September 18, 2012
बस,आ जाओ
सीधी सी बात यही है कि..
बस,तुम आओ....
चले आओ...मेरे पास.
कोई मौसम हो...
उससे क्या फर्क पड़ता है ?
मेरे मन के सारे मौसमों पे
तो बरसों बाद भी
एक बस तेरा ही कब्जा है .
मौसम का आना जाना
उससे मुझे क्या लेना देना
तुम्हारा आना....मेरे लिए
है बसंत का आना .
और प्रतीक्षा मत कराओ
कबसे ठहरा है बसंत उस मोड पे,
जहां मुड गए थे तुम मुझे छोड़ के .
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