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Tuesday, November 12, 2013

प्यार में हो न सकूंगी




तुम जबसे नहीं ज़िंदगी में
हरेक सुबह ऎसी है
जैसे कई दिन की छुट्टी के बाद काम पर जाना .

तुम्हारे बग़ैर ..
हरेक सड़क ,बस...वन वे
कुछ नहीं जिससे वापस आया जाये
और अगर लौटा भी जाए किसी तरह
तो ,सवाल यह की आखिर किसके लिए .

तुम्हारे बिना
नीला या लाल
गुलाबी या काली
किसी भी स्याही से लिखा,"मैं तुमसे प्यार करती हूँ "
आपने मायने खो देता है .

तुम नहीं हो जो ..
...तो,हमेशा का मतलब
बहुत-बहुत ज़्यादा लंबा अरसा
नहीं हो सकेगा,कभी.

नहीं होगे जब तुम करीब
तो बसंत से रहेगी दूरी
और यह स्याह सर्द सी ज़िंदगी
मेरे आगे अंतहीन खिंचती जायेंगी .

पता है,तुम्हें
यह सब क्यूँकर हुआ
क्यूंकि,तुम बिन ..
मैं प्यार में हो न सकूंगी
कुछ महसूस कर न सकूंगी.

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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