Wednesday, March 2, 2011

अलग होना

नाखून या रिश्ता सड़ रहे हों
तो,अलग होना पीड़ादायक नहीं होता
पर सांस ले रहे रिश्ते
या जुड़े हुए नाखून को
यूँ खींच कर अलग करना
बहुत तकलीफदेह होता है
बहुत पीड़ादायक...............
तुम खुद मुझे छोड़ते या मैं तुम्हें
तो मुझे दुःख नहीं होता
पर,तुम्हें जबरन मेरी ज़िन्दगी से निकाला गया
इस बात ने मुझे अन्दर तक
हिला कर रख दिया है
दर्द हुआ है मुझे बिलकुल वैसा
किसी का नाखून खींच कर
उसकी खाल से अलग कर दिया जाए जैसा

15 comments:

  1. excllnt nidhu.........now i caught you baby..........baht kuchh tum me kuchh kahin thehar gaya hai........tum wakai zingagi ko ko baht baanchti ho....baht alagh sa samanjasya piroyaa hai tumne rishte aur nakhoon ya shaarik takleef mein....actually kisi si alagh hona mansik trasadi hai.......keep it up...:))))<3

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  2. Mohammad ShahabuddinMarch 2, 2011 at 3:35 PM

    Isme kinchit matra bhi sanshay nahin hai ke Nidhi tumne har rishtey ko jiya hai, aur har rishtey mein pyaar kee bhavna, smarpan aur viyog aur virah ko mehsoos karke uska likha hai....Yeh kewal stree purush ke viyog tak hee seemet panktiyan nahin varan ismein paraspar prem kee bhavna chahe woh bahan-bhai, bahan-bahan, athwa mitron ke beech prem kee trasdii ho..... kalpana bhav mein uss peeda ka varnan kiya hai jisme yadi khaal se nakhun ko vibhajeet kiya jaaye toh jo peeda bhav hote hain...Yeh bahut marmik panktiyan hain...Mera ashish sdav tumhare saath, prasan raho aur likhte raho...

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  3. Sambandhon ke sameekaran sachmuch bahut durooh hotae hein !!!....ye sneh ke tantu jitnae komal aur saral hotae hein....unkae bandhan utnae hee sudridh aur jatil !!!...Na jaanae kab...kaisae woh humaarae antas mein phail jaatae hein.....theek uss amarbael kii tarah jo ek nireeh lataa see , saksham taru kaa buss avlamban bhar laetee hai ; aur daekhtae hee daekhtae usskae poorae astitva par chchaa jaatee hai !!!
    ....Phir aisae mein..... balaat door kiyae jaanae kaa dansh !.....waisaa hee jaisae kissi apnae hee ang kaa kaat kar alag kiyaa jaanaa !......asahneeya peedaa !!!....athaah vaednaa !!!.....akath yantradnaa !!!....
    ......Prem ke ye jaal jitnae sammohak hotae hein.....uss sae kahin adhikk kashtkar !!!
    .........Dr. Basheer Badr Sb ka ek sher yaad aa gayaa..........
    " Bichchadtae waqt koi badgumaanii dil mein aa jaatee ; Ussae bhi gham nahin hotaa, mujhae bhi gham nahin hotaa !!! "

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  4. शुक्रिया,डिम्पल !!!!!!!!यूँ तो तुमने बेनामी प्रतिक्रिया दी है पर मैंने अंदाजा लगा लिया की ये तुमने ही लिखा है....तुम्हें ,अच्छा लगा ये जान कर मुझे अच्छा लगा .....

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  5. MS...............आपसे मैं क्या कहूं...आपने तो सब कह दिया या कहों तो ये भी समझ लिया की वियोग का सम्बन्ध मात्र प्रेमी-प्रेमिका से नहीं है वरन ये वह भाव है जिसको आप हर रिश्ते में महसूस कर सकते हैं बशर्ते आप का जुड़ाव हो .......किसी से दिल से .आपके आशीर्वाद की ज़रुरत तो मुझे हमेशा रहेगी.......अपना स्नेह मुझपे यूँ ही बनाए रखियेगा

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  6. Nidhi.....Bhaawnaaon kae aavaeg mein daekho...mein to rachnaakaar ko hee bhool gayee !!!....Lekin yun daekho to ye bhi tumhaaree paroksh stutee hee hai !!!....Bhojan itnaa swaadisht ho ....kii hum rasaanubhootii mein prahnsaa hee karnaa bhool jaayein......to woh usskee aslee saarthaktaa.....aslee upbhalbdhii hee maanee jaayaegii !!!....Isskae aagae kyaa kahoon.......kii sambandhon ko aur man kee komal bhaawnaaon ko jitnaa baareekii se tum padh paatee ho....utnaa to jo unnko jeetaa hai sirf wahee samajh paataa hai !!!....shaayad tabhi tumhaaree kavitaayein....humein, humaaree ankahee anubhootiyon kaa swar lagteen hein....humaaree nitaant nijee peedaa kaa pratibimb !!!

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  7. बहुत ही मार्मिक और दर्द भरी अभिव्यक्ति है ... आपके शब्दों की पीड़ा 'अवर्णनीय' है....आपके शब्दों से टपकती संवेदना ने मुझे झकझोर कर रख दिया ..... रोंगटे खड़े हो गए मेरे ...

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  8. सच कहा दीदी आपने ......जब तक मिलना नहीं होता तब तक ठीक और जहां मिलने के बाद जुड़ाव उत्पन्न होता है उसके बाद अपना बस नहीं चल पाता है.........जाने -अनजाने कब वह जुड़ाव ......पुख्ता होता जाता है यह हम में से कोई नहीं जान पाता है .....अधिकांशतः यह तब समझ में आता है जब वह शख्स दूर जाने वाला होता है या दूर जा चूका होता है........उसकी कमी एहसास करा देती है की कितना कुछ साथ जुड़ा है.... उस से

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  9. अमित ,आपने पढ़ा ,सराहा,टिपण्णी करी .....सबसे पहले इसके लिए शुक्रिया!आप के रोंगटे खड़े हो गए यह जानकार अच्छा लगा क्यूंकि इससे ये पता चला की इस रचना ने आपके अंतःकरण को कहीं न कहीं अवश्य छुआ है

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  10. कल 13/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    1. यशवंत और विभारानी जी...आपका आभार.

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  11. दर्द हुआ है मुझे बिलकुल वैसा
    किसी का नाखून खींच कर
    उसकी खाल से अलग कर दिया जाए जैसा
    पीड़ा की गहनता कितनी साफ़ स्पष्ट उकेरी है आपने ...बहुत सुन्दर निधिजी

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  12. सरस जी.......उस पीड़ा को जिसे मैं बताना चाह रही थी,उसे आपने महसूस किया ...बस,काफी है,मेरे लिए.

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  13. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद!

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