Thursday, September 27, 2012

सिगरेट



तुम इतने संजीदा क्यूँ हो जाते हो
जब भी मैं यह कहती हूँ
सिगरेट पीने से उम्र कम हो जाती है
छोड़ क्यूँ नहीं देते इसे पीना .
मर जाओगे तो पता है
सांसें भले लेती रहूँ
पर मैं जीते हुए भी
रो-रो मर जाउंगी.

पता है ,तुम मर गए अगर
तो तुम्हारी तस्वीर को नहीं टांगूंगी दीवार पे...
न उसपे कोई माला चढाऊंगी
न ही अगरबत्ती जलाऊँगी ,उसके आगे.
अपनी माला के लोकेट में
पहन लूंगी,तुम्हारी तस्वीर
आस पास रहोगे मेरे दिल के.
अगरबत्ती न जला के
मैं ही सिगरेट पीना शुरू कर दूंगी
जिससे तुम तक पहुँच सके
सिगरेट का धुंआ...
और मैं भी उस धुंए में रहते रहते
जल्दी मर जाऊं
आकर के तुमसे मिल पाऊं.

14 comments:

  1. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति,,,,

    मैं ही सिगरेट पीना शुरू कर दूंगी
    जिससे तुम तक पहुँच सके
    सिगरेट का धुंआ...
    और मैं भी उस धुंए में रहते रहते
    जल्दी मर जाऊं
    आकर के तुमसे मिल पाऊं.,,,,

    मगर सिगरेट पीना स्वास्थ के लिये हानिकारक है,,,,,

    RECENT POST : गीत,



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    1. पता है हानिकारक है.पर,जानते बूझते भी हम कुछ काम करते ही हैं

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  2. मनुहार,तकरार- सबमें है प्यार

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  3. किसी तरह तो मानें और सिगरेट पीना छोड़ दें ... सुंदर प्रस्तुति

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    1. कोशिश हर तरह से

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  4. समझाने से ना माने तो क्या कीजे ...आगे तक नजर डाली !
    इन कल्पनाओं से भी ना छूटे सिगरेट तो क्या कीजे !

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    1. आदतें कहाँ छूटती हैं ..आसानी से.

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  5. बहुत सुंदरता से कही अपनी बात ,
    बहुत अच्छी रचना ...!!

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  6. क्या फायदा उस शख्स के लिए अपने आपको बर्बाद करने का सोचकर..?? गर सही मायने में वो आपको प्यार करता तो कब की आपकी बात मान कर ये सब छोड़ देता..पर ये सब महज़ दिखावा है..!! इसीलिये आप भी अपने लिए ही जीयें..!!

    रचना का plot अच्छा लगा..!!

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    1. इत्ता आसां नहीं होताहै ...सिगरेट छोड़ना.विदड्राल सिम्टमस् होते हैं

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  7. शिगरेट छोडने वालों में आता हूँ मैं ....9 साल हो गये अब ...
    कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता ... बस इक्छा शक्ति .........
    सादर
    भरत

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    1. आप की इच्छा शक्ति को सलाम....!!मैं कई लोगों को जानती हूँ कि छोड़ देते हैं पर कुछ दिन बाद फिर शुरू कर देते हैं.

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