Monday, January 2, 2012

तुम्हारे जाने की बात....



तुम्हारे जाने की बात....
पता चली ...कल रात
तबसे यही ख्याल,
बस,यही मलाल
कि....
इतना कम वक्त साथ गुज़ारने को मिला
सब विधाता का ही है ये ... किया धरा

उसमें भी,
कितने पल गंवाएं ..
इन्कार में इज़हार में ..
रूठने में,मनाने में ..

काश.....
उनमें बस प्रेम करते ...
नयी स्मृतियों के बीज रोपते....
पर,मैंने तो सुना है प्रेम में रूठना भी ज़रूरी होता है
बोलो न,
इन ....
रूठने-मनाने के दिन और रातों को
इन्कार इकरार से जुडी सब बातों को
याद रखोगे....क्या????

42 comments:

  1. रूठने-मनाने के दिन और रातों को
    इन्कार इकरार से जुडी सब बातों को
    याद रखोगे....क्या????

    ... सुंदर अभिव्यक्ति...
    नववर्ष की मंगल कामनाएँ

    ReplyDelete
  2. खाली होते दिल के प्रश्न ...

    ReplyDelete
  3. बोलो न,
    इन ....
    रूठने-मनाने के दिन और रातों को
    इन्कार इकरार से जुडी सब बातों को
    याद रखोगे....क्या????

    उफ़ ………अब इस मासूमियत पर कोई क्या कहे? बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

    ReplyDelete
  4. सब कुछ याद रहता है जो प्रेम के लिए होता है ...
    नव वर्ष की मंगल कामनाएं ...

    ReplyDelete
  5. रूठने-मनाने के दिन और रातों को
    इन्कार इकरार से जुडी सब बातों को
    याद रखोगे....क्या????

    खूबसूरती से लिखे एहसास

    नव वर्ष की शुभकामनायें

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर रचना...मन के हर कोने को उजागर कर गयी...निधि जी

    ReplyDelete
  7. आस पास के जिन्दा लोगों से प्रेम करना इतना मुश्किल क्यों होता है? कितना सरल होता है गुजर चुकों की यादों पर कविताएं रचना।

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    नव वर्ष की शुभकामनायें|

    ReplyDelete
  9. आप के ब्लॉग पर पहली बार आना हुआ ,प्यारा ब्लॉग बनाया आप ने,आप की ये रचना बहुत ही अच्छी और दिल को छु जाने वाली है.....फेसबुक पर शेयर कर रही हूँ,मेरी मित्र मण्डली भी ऐसी उम्दा कविताये बहुत पसंद करती है .....

    ReplyDelete
  10. पद्म सिंह जी...बहुत बहुत शुक्रिया,आपका.

    ReplyDelete
  11. रश्मिप्रभा जी...दिल जब खालीहोने वाला होता है...तो ऐसा ही द्वन्द उठता है

    ReplyDelete
  12. वन्दना....आभार!.प्यार खुद ही इतना मासूम होता है कि उससे जुडी हर अभिव्यक्ति अपने आप ही मासूम हो जाती है.

    ReplyDelete
  13. दिगंबर जी ....आपने सच कहा ...प्रेम है तो भूलने का प्रश्न ही कहाँ आता है?हाँ,पर कभी कभार आश्वासन अच्छा लगता है .

    ReplyDelete
  14. संगीता जी...आपको भी नववर्ष की शुभकामनायें!! प्रशंसा हेतु,धन्यवाद!

    ReplyDelete
  15. संजय जी...आपकी नवाजिश है.

    ReplyDelete
  16. राजे जी...लोग दूर चले जायें तो उसका मतलब गुजरना कतई नहीं होता ..कवितायें पास रहने वालों पे ,प्यार पे लिखना भी उतना ही सरल है..ऐसा कोई मुश्किल नहीं है.

    ReplyDelete
  17. Patali-The-Village....नव वर्ष की मंगलकामनाएं!!पसंद करने के लिए आभार१!

    ReplyDelete
  18. अवंति...थैंक्स! ! आपको अच्छा लगा यह जान कर मुझे भी अच्छा लगा .साझा करने के लिए भी आभार .उम्मीद करती हूँ मित्र मंडली को पसंद आएगा

    ReplyDelete
  19. बेहतरीन अभिवयक्ति..

    ReplyDelete
  20. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति
    कल 04/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, 2011 बीता नहीं है ... !

    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  21. सुषमा...हार्दिक धन्यवाद!!

    ReplyDelete
  22. बहुत खूब...कल की हलचल की शान रहेगी आपकी ये रचना.
    बधाई.

    ReplyDelete
  23. kuch log to chale hi jate hai ...unko rokna hamare bas me nahi hota ...ye samaya bhi kuch yesa hi hai ...bahut hi sarthak rachna ....prabhavi kavita

    ReplyDelete
  24. एक फलसफा बयान करती नज़्म.. बहुत ही गहरी भावों की अभिव्यक्ति.. पढते हुए बस डूब जाने को जी करता है!!

    ReplyDelete
  25. यशवंत....शुक्रिया!!

    ReplyDelete
  26. विद्या...बहुत-बहुत धन्यवाद!!

    ReplyDelete
  27. अशोक जी...हाँ,यह तो है...कुछ लोग चले ही जाते हैं.पसंद करने हेतु,आभार!!!

    ReplyDelete
  28. संवेदना...डूब जाईये...किसने रोका है?

    ReplyDelete
  29. एहसास तो सारे याद रहते ही हैं....हमेशा..

    ReplyDelete
  30. काश.....
    उनमें बस प्रेम करते ...
    नयी स्मृतियों के बीज रोपते....
    पर,मैंने तो सुना है प्रेम में रूठना भी ज़रूरी होता है
    बोलो न,
    इन ....
    रूठने-मनाने के दिन और रातों को
    इन्कार इकरार से जुडी सब बातों को
    याद रखोगे....क्या????
    .......
    निधि जी याद तो रखेगा मगर कभी जनायेगा नहीं कभी लबों पर नहीं लाएगा ...ऐसे याद रखने से तो अच्छा है कि भूल ही जाये
    क्यों रुलाते हो आप ऐसी बातें लिख कर ???

    ReplyDelete
  31. कुमार...एहसास तो दिल पे नक्श बना जाते हैं...हमेशा ही याद रहते हैं.

    ReplyDelete
  32. रीना...हार्दिक धन्यवाद!!

    ReplyDelete
  33. आनंद जी...दिक्कत ही यही है कि याद रखेगा पर जताएगा नहीं..खैर उसपे फिर आंसू जब्त करूंगी तो एक नयी कविता सामने आ जायेगी

    ReplyDelete
    Replies
    1. Bahut sahi jawaab hai aapka. Anandji ki baaton se sahmat hu, ki is kavita ne rulaya mujhe bhi. Lekin yeh bhi sahi hai dard kavita ban bahar nikalega tab bhi usi ki to yaad aayegi, jo khoobsurat hogi har roop mai.

      Delete
    2. शैफाली...सहमति हेतु धन्यवाद१!

      Delete
  34. ..सुंदर रचना ... निधि ..

    फिर ‘मलाल’ नहीं कोई ... ‘खुशी’ होती हमें
    साथ गुजरा ‘वक्त’ गर सचमुच साथ गुजरा होता

    ReplyDelete
    Replies
    1. अमित....यकीनन आपने सही कहा ..कई बार लोग...साथ वक्त तो गुजारते हैं पर साथ नहीं होते .

      Delete
  35. bahut achchhi rachna Nidhi hamesha ke tarah ..
    पर,मैंने तो सुना है प्रेम में रूठना भी ज़रूरी होता है
    बोलो न,
    इन ....
    sunder aati sunder

    ReplyDelete
    Replies
    1. ब्रजेश....अब तो कई कई दिन बाद आपके कमेन्ट पढ़ने को मिलते हैं...खैर,शुक्रिया...पसंद करने के लिए..

      Delete

टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

Followers