Wednesday, January 25, 2012

उन्मुक्त उडो.....


बहुत दिन सहेजने के बाद
आज छोड़ दिया है ,तुम्हें.
अब.......
नया आसमान है
नया एक जहां है
तैयारी करो ..
अपनी नयी उड़ान की
बाध्यता न हो,
पुरानी पहचान की .

उन्मुक्त उडो ,जी भर के जियो
पिछला सब भूल के आगे बढ़ो .
हाँ,बस इतना याद रखना
कि
जब थकने लगो
या हारने लगो ....कभी .
तो हाथ बढ़ाना
मेरा हाथ होगा थामने के लिए तुम्हें..
आस-पास ही कहीं .

38 comments:

  1. अपनों की उन्मुक्त उड़ान के लिए शुभकामनायें

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया !!

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  2. उन्मुक्त उडो ,जी भर के जियो
    पिछला सब भूल के आगे बढ़ो .
    हाँ,बस इतना याद रखना
    कि
    जब थकने लगो
    या हारने लगो ....कभी .
    तो हाथ बढ़ाना
    मेरा हाथ होगा थामने के लिए तुम्हें..
    आस-पास ही कहीं ...
    यही यकीन तुम्हारे पंखों की उर्जा बनेगी

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    1. रश्मि जी आपकी इस एक पंक्ति ने जैसे मेरी इस कविता के अधूरेपन को पूरा कर दिया ...आभार

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  3. उड़ने का हौसला और थामने का आश्वासन बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. जब कोई थामने वाला हो और हौसला बढाने वाला तो फिर तो उडान उन्मुक्त ही होगी।

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    1. हार्दिक धन्यवाद!!

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  6. सकारात्मक सोच के साथ लिखी गई प्रभावी रचना ...

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  7. बहुत सुन्दर...
    encouraging poem..

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  8. सकरात्मक अभिवयक्ति................

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    1. हार्दिक धन्यवाद !!

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  9. जब थकने लगो
    या हारने लगो ....कभी .
    तो हाथ बढ़ाना
    मेरा हाथ होगा थामने के लिए तुम्हें..
    आस-पास ही कहीं .

    वाह..वाह ...इस बेजोड़ रचना के लिए बधाई..


    नीरज

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    1. पसंद करने के लिए ...थैंक्स !!

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  10. उन्मुक्त उडो ,जी भर के जियो
    पिछला सब भूल के आगे बढ़ो .
    हाँ,बस इतना याद रखना
    कि
    जब थकने लगो
    या हारने लगो ....कभी .
    तो हाथ बढ़ाना
    मेरा हाथ होगा थामने के लिए तुम्हें
    आस-पास ही कहीं ...
    इस उड़ान की थकान से उबारने के लिए
    और नए गंतव्यों पर उड़ान के लिए
    तब तक
    जब तक कि
    तुम घर न लौट आओ
    इस अनुभव के साथ कि
    बाहर सब व्यर्थ है
    अंतस ही सर्वस्व है
    शुभ है!!! शुभ है!!!शुभ है!!!

    बेहतरीन उन्मुक्त उड़ान

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    1. आपने बिलकुल ठीक कहा कि अंतस ही सर्वस्व है....बाकी सब व्यर्थ है और यह बात हम जितनी जल्दी समझ जाएँ उतना ही अच्छा है,हमारे लिए.

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  11. उन्मुक्त उडो ,जी भर के जियो
    पिछला सब भूल के आगे बढ़ो .
    हाँ,बस इतना याद रखना
    कि
    जब थकने लगो
    या हारने लगो ....कभी .
    तो हाथ बढ़ाना
    मेरा हाथ होगा थामने के लिए तुम्हें..
    आस-पास ही कहीं ...
    तुम्हारी थकान हार को दूर करने के लिए
    तुम्हें फिर से ऊर्जस्वित करने के लिए
    ताकि तुम नए गंतव्यों की ओर
    और ऊंची उड़ान भर सको
    और तुम जान सको बाहर की व्यर्थता
    और घर लौट सको
    नए जन्म के साथ
    बाहर व्यर्थ अंतस समर्थ
    बाहर तमस अंतस चेतन

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    1. आपकी दो टिप्पणी...उसी बात को अलग अलग ढंग से आगे बढ़ा रही हैं कि बाहारी सब व्यर्थ है..निस्सार है ...वास्तव में जिसकी महत्ता है वो अंतस ही है

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    2. एक ही बात दो बार कहने में अंतर तो आ ही जाता है.

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  12. जीवन को उड़ान देती सार्थक रचना...

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    1. आपको पसंद आई...धन्यवाद .

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  13. निधि जी...पता नहीं क्यों मेरी टिप्पणी स्पैम हो जाती हैं?

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    1. आपकी टिप्पणियों से लगता है कुछ खास दुश्मनी है

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  14. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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    1. शुक्रिया!!मैं अवश्य आउंगी आपके ब्लॉग पर.

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  15. अपनी नयी उड़ान की
    बाध्यता न हो,
    पुरानी पहचान की .

    उत्साह जगती सुन्दर रचना... गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें...

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    1. धन्यवाद.....आपको भी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  16. बहुत सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति|
    गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें|

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    1. आभार!!आपको भी गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें!!

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  17. सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं....!

    गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं....!

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    1. साधारण में भी सुंदरता ढूंढ लेने के लिए ,आभार!!

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  18. बढ़िया अभिव्यक्ति अच्छी रचना,..

    NEW POST --26 जनवरी आया है....

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