Thursday, January 19, 2012

सांस और धडकन की तरह

तुम कहते हो मेरे बिना  कैसे रहोगे?
मानो न मेरी बात
रह लोगे..मेरी जान.
पता है,मुझे ...
हर कोई रह लेता है
हर किसी के बगैर .

मेरी बातें,वो मुलाकातें
होंगे तेरे साथ...दिन -रात.
बताओ न,फिर कैसे अकेले होगे तुम?

मैंने,इतना तो इंतजाम कर दिया है
कि
ताउम्र....
मेरी यादें,प्यार की वो सौगातें
तेरा पीछा कभी नहीं छोडेंगी .

तुम कहीं भी रहो,किसी हाल में रहो
मैं साथ रहूँगी तेरे
सांस और धडकन की तरह .
जो हमारे अन्दर ही रहते हैं .
पर, यूँ कि एहसास नहीं होता
उनके होने का .

43 comments:

  1. बहुत सुन्दर...
    सच है..कुछ एहसास भीतर पलते हैं...चुपके चुपके...

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  2. विद्या....जैसे हमें सांस लेने का पता नहीं चलता...दिल के धड़कने का घडी -घडी एहसास नहीं होता...बिलकुल ऐसे ही कुछ लोगों से जुडी यादें होती हैं....जो हमेशा साथ चलती हैं.

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  3. सांस...धड़कन...हमेशा हमारे साथ होती हैं, पर इनका पता तभी चलता है जब हम इनकी ओर ध्यान देते हैं...

    प्यार भी कुछ ऐसा ही अहसास है
    यह कब होता है
    और कब इतना सहज हो जाता है
    कि इसकी सुगंध रोम-रोम मे फैल जाता है
    और कभी जुदा नहीं होता
    चाहे भौतिक रूप से दूरियां बढ़ जाएं
    पर वो सुगंध बनी रहती है
    कुछ यादों में तो कुछ उन सौगातों में
    जो प्रियतम ने प्रेम के क्षणों में
    रख छोड़ी थी
    .
    सांस आती जाती है एक लय में
    रास आती जाती है जिंदगी एक वय में
    साथ सांसों सा हो तो जिंदगी रसमय है
    .

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    1. मनोज जी...पहले तो आपकी इस खूबसूरत टिप्पणी के लिए धन्यवाद.आपने बिलकुल सही कहा...साथ साँसों सा हो...जिसका होना यूँ तो पता न चले..पर वो हमेशा साथ रहे....और वो न हो तो दम सा घुटने लगे .

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  4. पता है,मुझे ...
    हर कोई रह लेता है
    हर किसी के बगैर .
    जीवन जीने की प्रेरणा देती सुन्दर रचना.... निधि जी

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    1. शुक्रिया...संजय जी.

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  5. साँस और धड़कन दोनों का ही महत्‍व है

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    1. संजय जी...बिन इनके जीवन ही कहाँ है?

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  6. रहना और विवश हो रहना - दो अलग बातें हैं .

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    1. रश्मि जी....जब पता हो कि बिछडना ही है...तो यादों के सहारे ही जीना पड़ता है.अब इसे विवशता कह लिया जाए या यादों के साथ ...उसके साथ रहने का एक नया तरीका.

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    1. यशवंत...पसंद करने हेतु धनयवाद!!

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  8. bahut sundar...ye prashn har koi puchhna chahta hai....

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    1. आशा जी..प्रश्न हर कोई पूछना चाहता है ...इसका उत्तर देना बड़ा तकलीफदेह होता है..क्यूंकि यह कहना ,स्वीकारना कि तुम्हारे बिना रहना पडेगा आसान नहीं होता .

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  9. यादें अहसास हैं, याद रहती हैं सदा इसलिए तो याद हैं...

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    1. यादें तो हमेशा साथ रहती हैं......

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  10. बेहतरीन शब्‍द रचना ।

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  11. कुछ खास यादें तो हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं ..

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    1. दुरुस्त फ़रमाया,आपने.कुछ यादें..अमिट छाप सी होती हैं.

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  12. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 21/1/2012 को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

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    1. अनुपमा...थैंक्स!!

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  13. सुन्दर और बेहतरीन काव्य प्रस्तुति

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    1. आपको अच्छी लगी जान कर अच्छा लगा.

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  14. bahut bahut sundar gahan bhavo ko vykt karati rachana hai..

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    1. पसंद करने के लिए तहे दिल से आपका शुक्रिया!!

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  15. ताउम्र....
    मेरी यादें,प्यार की वो सौगातें
    तेरा पीछा कभी नहीं छोडेंगी .
    तुम कहीं भी रहो,किसी हाल में रहो
    मैं साथ तो होउंगी ही

    bahut hi prabhavshali rachana Tandan ji ...badhai sweekaren.

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    1. बहुत बहुत आभारी हूँ.

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  16. "मैं साथ तो होउंगी ही
    सांस और धडकन की तरह .
    जो होते तो हैं ..
    पर, यूँ एहसास नहीं होता
    उनके होने का ."

    बहुत सुंदर !

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  17. साँसों और धडकन का तो वैसे भी साथ है उम्र भर का ... और प्रेम हो जो दो जिस्म भी ऐसे ही हो जाते हैं ...

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    1. दिगंबर जी...प्रेम ही का तो सारा खेल है...

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  18. Replies
    1. अरुण जी .....थैंक्स !!

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  19. This comment has been removed by the author.

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  20. बहुत अच्छी कविता।
    प्रत्येक व्यक्ति के साथ प्रति क्षण कोई न कोई अवश्य रहता है, चाहे व्यक्ति के रूप में या उसकी यादों के रूप में।

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    1. महेंद्र जी...आप की बात से सहमत हूँ .

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  21. प्रेम के बगैर जीना ...एक एहसान करना होता है खुद पर ...जीवन के रंगमंच पर अभिनय करना होता है ...ऐसा अभिनय जिसमें दर्द छिपाकर मुस्कुराना पड़ता है ....कुछ यूँ कि देखने वाले को मुस्कान सच लगे ....दर्द दिखाई भी न दे

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    1. तूलिका..क्या किया जाए...यह अभिनय तो हम में से अधिकतर लोग करते हैं...अच्छा....वैसे इस के लिए हम सभी को कम से कम एक ऑस्कर...चलो ऑस्कर नहीं तो एक फिल्मफेयर अवार्ड तो मिलना ही चाहिए.

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