Wednesday, February 15, 2012

चक्रव्यूह




मेरा दिमाग आजकल दिल पे खूब बिगडता है ..
कहता है..मना करता है ...समझाता है
पुरजोर कोशिश करता है
कि
मैं इस जी के जंजाल में ना पडूँ .
इक बार फंसी तो निकल नहीं पाउंगी
चक्रव्यूह है ये ,अन्दर ही रह जाउंगी

मैं क्या करूँ ..
हैरान हूँ ...मैं अपनी इस हालत पे
कुछ खींच रहा है मुझे अपनी ओर
बस ही नहीं चल रहा ,मेरा....खुद पे
किसी और के हाथ में हो गयी है मेरी डोर.


दिल उतरता जाता है,डूबता जाता है
इश्क के इस दरिया में...
दिमाग अलग खडा मुस्कुराता जाता है ...
मैंने तो मना किया था
अब तुम जानो....तुम्हारा खुदा जाने
कि तुम डूबे ,मरे या पार हुए.

24 comments:

  1. बेहतरीन गीत...बधाई स्वीकारें

    नीरज

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  2. इस चक्रव्यूह में तो दिल गंवाना ही होता है .....डूबना ..मरना ...फिर तरना भी यहीं होता है .....दिल-दिमाग की जद्दोज़हद को खूबसूरती से उकेरा है निधि ...बधाई

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    1. अब अंदर आ ही गए तो कोई रास्ता भी तो नहीं लौटने का.... डूबेंगे .. पार होंगे

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  3. इश्क़ का दरिया है ... हिम्मत रखिए ... तैर ही जाएंगे ...

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    1. आपकी दुआ दूर तक साथ निभाएगी

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  4. ये इश्क नही आसाँ बस इतना समझ लीजे ………………

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    1. आ रहा है समझ में, थोडा-थोड़ा...बाक़ी का भी जल्द ही आ जाएगा

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  5. "किसी और के हाथ में हो गयी है मेरी डोर."
    सच कहा आपने। प्रेम चक्रव्यूह ही तो है। हम स्वयं ही किसी के अधीन हो जाते हैं।
    सुंदर प्रस्तुति

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    1. वो अधीन होना भी तो कितना सुखकारी है

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  6. किसी और के हाथ में हो गयी है मेरी डोर."बहुत ही प्यारी और भावो को संजोये रचना......

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  7. बेहतरीन सुंदर सटीक रचना, बहुत अच्छी प्रस्तुति,
    MY NEW POST ...कामयाबी...

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    1. धीरेन्द्र जी ....थैंक्स!!

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  8. खूबसूरत..

    ...


    "कोशिश ना करना..
    थक जाओगे..
    रहना करीब..
    रम जाओगे..!!"

    ...

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  9. दिल हमेशा दिमाग पे जीतता आया है ... लाजवाब लिखा है ...

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  10. कुछ लोगों का दिमाग जीतता है ..

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  11. चक्रव्यूह में ना पड़ो... तो बहुत कुछ जानना अधूरा रह जाता है
    और इश्क तो बिलकुल नहीं आसान

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    1. हाँ कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना ही पड़ता है

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  12. नयंक पटेलMarch 5, 2012 at 9:56 AM

    वो चक्रव्यूह हो या दरिया , दिल के दबाव में अगर उस तरफ खीच भी गए, बेह भी गए तो क्या ? चाहते तो सभी है उसमे डूब या मर जाने को .....दिमाग व्यंग तो करेगा ...खुश कौन होता है किसी को अपनी मन चाही मंजिल पाने पर ?.....दिल अगर नो रिटर्न एक्सिट में भी ले जाता है ...कोई बात नहीं ...वो आपकी मंजिल तक जरूर पहुंचा देगा .....बस दिल का कहा मानिये ..

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    1. आपकी सलाह का शुक्रिया...नयंक जी. मैं दिल की सुनूंगी और उसका ही कहा मानूंगी .यूँ भी ....मेरे दिल की धडकनें इतनी शिद्दत से अपनी बात मनवा लेती हैं कि मेरे पास दिल की सुनने के अलावा कोई चारा नहीं बचता .

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  13. इस चक्रव्यूह में फंस कर स्वयं को मिटा डालना ही सार्थक है...क्योंकि यह चक्रव्यूह ही तो वस्तुत: हमारा उत्स है...इसको जानने के लिए स्वयं को इस भंवर के सुपुर्द करना बेहद जरुरी है...भंवर ज्यादा देर तक नहीं रहते...

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    1. आपने बिलकुल दुरुस्त फ़रमाया ....सुपुर्दगी ज़रूरी है....यूँ भी भंवर ज्यादा देर तक नहीं रहते

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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