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Saturday, August 22, 2015

सच्चाई

हार जाती हूँ हर बार
दिल दिमाग की लड़ाई में यार
दिमाग कहता है सब छोड़ के आगे बढ़ो
दिल समझाता है रुको एक मौक़ा और दो
इनकी इस खींचातानी में पिसती जाती हूँ
यूँ देखें तो इनकी कोई ख़ास गलती नहीं
सामने जब तुम आते हो
दिल दिमाग दोनों  में से
किसी की भी चलती नहीं
मेरी तरह ये फेर में पड़ जाते हैं
क्यूंकि.............
इन्होंने आज तक इतनी सच्चाई से
झूठ बोलते किसी को भी देखा नहीं

Wednesday, February 15, 2012

चक्रव्यूह




मेरा दिमाग आजकल दिल पे खूब बिगडता है ..
कहता है..मना करता है ...समझाता है
पुरजोर कोशिश करता है
कि
मैं इस जी के जंजाल में ना पडूँ .
इक बार फंसी तो निकल नहीं पाउंगी
चक्रव्यूह है ये ,अन्दर ही रह जाउंगी

मैं क्या करूँ ..
हैरान हूँ ...मैं अपनी इस हालत पे
कुछ खींच रहा है मुझे अपनी ओर
बस ही नहीं चल रहा ,मेरा....खुद पे
किसी और के हाथ में हो गयी है मेरी डोर.


दिल उतरता जाता है,डूबता जाता है
इश्क के इस दरिया में...
दिमाग अलग खडा मुस्कुराता जाता है ...
मैंने तो मना किया था
अब तुम जानो....तुम्हारा खुदा जाने
कि तुम डूबे ,मरे या पार हुए.

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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