Thursday, February 16, 2012

रिश्ते का नाम



तुम कहते हो
तुम्हारी फ़िक्र न करूँ ...
मैं खुश रहूँ ....
क्या लगते हो तुम मेरे,अब?
जो मैं तुम्हारी परवाह करूं .

मैं क्या करूँ???
तेरे दर्द की सारी लकीरें चल के
सीधी मुझ तक आ जाती हैं.
तेरी आँखों से बह के अश्क
मेरी आँखों में आ जाते हैं .
उदासी जब कभी तुम्हें घेरती है
साथ मुझे भी आगोश में ले लेती है .
तुम्हारी ये जो सारी तकलीफें हैं
मुझमें ही आकर पनाह लेती हैं .
सारे ये जो गम हैं न ,तुम्हारे
मुझमें आकर ठहर जाते हैं.

सब........
बंटता है मेरे-तुम्हारे बीच
चाहा-अनचाहा ,कहा-अनकहा ,सुना-अनसुना .
फिर भी पूछते हो तुम
इस दर्द के रिश्ते का नाम .

30 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना निधि जी...

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  2. behad bhaavpurn...

    सारे ये जो गम हैं न ,तुम्हारे
    मुझमें आकर ठहर जाते हैं.

    shubhkaamnaayen

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    1. थैंक्स...पसंद करने के लिए.

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  3. बेहद खूबसूरत..!!!

    ...


    "तेरा हर दर्द तड़पाता है..
    जैसे मेरे दर्द से तुम बिलख जाते हो..
    रिश्ते का फंदा भूला देते हैं..
    आ..मेरी जां..
    दास्ताँ नयी लिखा देते हैं..!!"


    ...

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    1. चलो...यही करते हैं ...नयी दास्ताँ लिखते हैं .

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  4. आपका और उनका रिश्ता है ही अनोखा.
    दर्द और प्यार का अनूठा संगम.

    निधि जी,आप वादे के बाबजूद नहीं आईं हैं.
    किस से शिकायत करूँ आपकी ?

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    1. शिकायत मत कीजिए...मैं स्वीकारती हूँ ,भूल गयी.पक्का आउंगी.

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  5. निधि जी बहुत सुन्दर ..जितना सुन्दर मूल भाव ..उतने सुन्दर शब्दों का चयन और गठन....बेहद ख़ूबसूरत रचना!

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    1. शब्द चयन के साथ-साथ भावों के प्रस्तुतीकरण को पसंद करने के लिए..शुक्रिया !!

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  6. सब........
    बंटता है मेरे-तुम्हारे बीच
    चाहा-अनचाहा ,कहा-अनकहा ,सुना-अनसुना .
    फिर भी पूछते हो तुम
    इस दर्द के रिश्ते का नाम
    .........शब्दों के अर्थ के साथ कविता की सुन्दरता बढ गई ....

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    1. पुनः ...आपका आभार!!पसंद करने हेतु .

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  7. बहुत सुंदर शब्दों का संयोजन बधाई

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    1. तहे दिल से शुक्रिया!!

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  8. वाह!!!!!निधि जी ,...बहुत अच्छी प्रस्तुति, सुंदर भाव भरी रचना

    MY NEW POST ...सम्बोधन...

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  9. निधि जी,...आपका फालोवर बन गया हूँ आप भी बने,खुशी होगी,...

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  10. बहुत से रिश्तों का कोई नाम नहीं होता ... और दर्द का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही है ... गहरी रचना ...

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  11. मैं क्या करूँ???
    तेरे दर्द की सारी लकीरें चल के
    सीधी मुझ तक आ जाती हैं.
    तेरी आँखों से बह के अश्क
    मेरी आँखों में आ जाते हैं .
    उदासी जब कभी तुम्हें घेरती है
    साथ मुझे भी आगोश में ले लेती है ... इस मन की थाह कोई जानता , कोई नहीं तुम तो सही ...फिर नाम हो न हो क्या फर्क पड़ता है

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    1. हम्म्म्म....नाम से कोई फर्क पड़ता है क्या?

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  12. प्रेम में प्रेमी/प्रेमिका की हर दुख-तकलीफ का इको होता है हृदय की गहराई में...

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    1. सच...दुःख सुख दोनों का ही इको होता है .

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  13. खूबसूरत कविता ,रिश्तों की पड़ताल करती हुई !

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    1. सीमान्त जी....हार्दिक आभार!!

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  14. निधि जी ,पहली बार पढ़ा है आपको और ये अफ़सोस हुआ कि अब तक क्यों दूर रही आपसे .......बहुत सुन्दर हृदयस्पर्शी लेखन...अब दूर न रह पाऊँगी ......

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    1. उम्मीद है आगे भी आपको निराश नहीं करूंगी ...और साथ यूँ ही बना रहेगा .

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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