Sunday, December 25, 2011

यू एस पी


तुम और मैं
दो विपरीत व्यक्तित्व
तब भी चुम्बक की तरह
एक दूजे की ओर खिंचे चले आये...
क्या सच...विपरीतता ही आकर्षण का कारण बनी
या
मेरी जो कमियां हैं वो तुम पूरी कर देते हो
और तुम्हारा अधूरापन मैं भर देती हूँ ..
एक दूसरे के पूरक हो गए हैं हम.

एक दूजे को ... संपूर्ण कर देना ही ..
हमारे इस रिश्ते की यू एस पी है ..है न?!!

25 comments:

  1. एक दूजे को ... संपूर्ण कर देना ही ..
    हमारे इस रिश्ते की यू एस पी है ...bilkul

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  2. U.S.P. [union of supporting personalities] A good smart thought about life .....thanks.

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  3. wah kya pyara USP hai....

    bahut sundar

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  4. रश्मि जी...मुझे तो लगता है ...एक दूसरे को संपूर्ण करना हर रिश्ते की यू एस पी होनी चाहिए

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  5. uday ji...Thanks for elaborating on the abbreviation and liking the poem,too.

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  6. प्रकाश...शुक्रिया...पसंद करने के लिए इस यू एस पी को .

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  7. यू एस पी का फुल फार्म बताए..(बाकी सब समझ में आ गया
    सुंदर पोस्ट........

    मेरे नए पोस्ट के लिए--"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"--में click करे

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  8. विपरीतता ही आकर्षण का करण है ..सुन्दर अभिव्यक्ति

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  9. धीरेन्द्र जी...ऊपर उदय जी ने फुल फॉर्म बता दिया है...देखिएगा.

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  10. संगीता जी..पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद .

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  11. वाह! अति सुन्दर यू एस पी.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए शुक्रिया,निधि जी.

    मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
    'हनुमान लीला भाग-२'पर आपका स्वागत है.

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  12. कल 27/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  13. राकेश जी....धन्यवाद!!.मैं अवश्य आउंगी...आपके ब्लॉग पर .

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  14. यशवंत...थैंक्स !!

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  15. सुन्दर सकारात्मक अभिव्यक्ति....
    सादर बधाई...

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  16. सृष्टि का सारा कार्य दो विपरीत गुणों के संतुलन पर आधारित है, इस तथ्य को बड़ी खूबसूरती से आपने शब्दों में बांधा है।

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  17. संजय जी..रचना को पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!!

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  18. महेंद्र जी...रचना आपको पसंद आई...शुक्रिया!!

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  19. बहुत सुंदर चित्रण..!!!

    ...

    "तेरे एक स्पर्श से..
    पूर्ण हुई..
    जो थाम लो हाथ..
    सम्पूर्ण हो जाऊँगी..!!"

    ...

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  20. प्रियंका.. पूर्ण से संपूर्ण हो जाने में ही जीवन की सार्थकता है.

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  21. ..बहुत सुंदर और सटीक रचना है ..निधी ..

    है अलग बात कि ... ‘घर्षण’ होता है
    पर विपरीत वस्तुओं में आकर्षण होता है

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    1. शुक्रिया.....अमित.
      विपरीत ध्रुवों का आकर्षण तो यु भी मशहूर है आपने शेर में बता कर और पुख्ता कर दिया

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  22. एक दूसरे के पूरक होकर ...एक दूसरे को संपूर्ण कर देना ....प्रेम का चरम है निधि ...इसे महसूस कर चुकी हो ....अभिव्यक्त किया है ....सौभाग्यशाली हो ...बधाई

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    1. तूलिका.....प्रेम का चरम....कुछ एक खुशनसीबों के हिस्से ही आ पाता है...मन अलमस्त फ़कीर हो जाता है,उसके बाद.बधाई के लिए शुक्रिया !!

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