Wednesday, September 12, 2012

शुक्रिया....प्यार



एक तेरे आ जाने से
कितना कुछ आया है
मेरे जीवन में .

ढेर से डर हैं ...
तुझसे मिल नहीं पाने के .
रोज़ एक नयी आशंका
बिछड जाने की .
बातें ..
कही -अनकही
सरकारी दफ्तर की
पेंडिंग फाइलों सी....
खत्म ही नहीं होतीं .
रतजगे ...
जिनमें एहसासों के तार जुड़े .
आंसू,हँसी,....
इन सब के सिलसिले .

एक मुहब्बत के साथ
कितने सारे बदलाव आ जाते हैं जीवन में .
शुक्रिया,प्यार...
जीवन में यूँ दबे पाँव आने के लिए
हरेक शै पे यूँ छा जाने के लिए.

Sunday, September 9, 2012

न जाने कहाँ गयी ....




जेठ की तपती दुपहरी
गरम साँसों की आवाजाही
लू भी जब जी जला रही
तब...एकाएक
उसने कहा कि
वो दूर जाने वाला है
कुछ दिन का विरह
बीच में आने वाला है .

मैंने कहा,बता कर जाना
उसका कहना कि
मुझसे कहे बिना क्या
संभव होगा उसका जा पाना ?

वो गया ...
जब चला गया...
दुनिया ने बताया .
जब लौटा ..तब भी....
जग ने ही खबर दी,
उसकी वापसी की .
बताने की ज़रूरत उसे
महसूस ही नहीं हुई .
उसकी ज़िंदगी वैसे ही
मेरे बिन भी चलती रही .

बड़े दिन बाद
एक दिन बात हुई
शिकवे हुए शिकायत हुई
पर,
उसकी आवाज़ की ठंडक
कलेजे के खून को जमा गयी
आषाढ़ के महीने में भी
रिश्तों में से गर्माहट
न जाने कहाँ गयी .

Saturday, September 8, 2012

आप्शन



विदा ही एकमात्र आप्शन है
उन सभी के प्रेम के लिए
जो मोहब्बत तो करते हैं ...
पर......
नैतिकता को छोड़ नहीं पाते .

वो भले दुखी हों ,पर
सारा समाज सुखी है..कि
जिनके मन मिले...थे
उनके शरीर को मिलने नहीं दिया.
वो खडा रहा
पहरेदार बन कर
जब भी कभी
मेरे हाथों ने ,होठों ने
तुम्हें छूना चाहा .

सारे संस्कारों की दुहाई दे दी गयी
कि वो चाहते रहे
एक दूसरे को ,हमेशा
पर...मिलन की कोई सूरत न हो.

प्यार ...बस तब तक प्यार है
जब तक ..अलग अलग बिस्तरों पे
हम एक दूसरे को याद करते -करते
अपनी शराफत ..अपने मूल्यों को
साथ लेकर सोते रहे,रोते रहे ....

सारी मर्यादाएं ,वर्जनाएं
साथ साथ चलती रहीं
मेरी तेरी उदासीनता के साथ
और कहती रहीं...
ज्यादा अच्छे लोगों को ..कुछ भी हो
प्रेम ना होने पाए कभी."

Friday, September 7, 2012

सच में....



प्रेम का इतिहास,जुगराफिया
फिजिक्स,केमिस्ट्री
कुछ नहीं पता.
जानती हूँ बस इतना
कि जब वो नहीं होता
तो सब बेस्वाद हो जाता है.

किसी काम में मन नहीं रुचता
कुछ भी अच्छा नहीं लगता
हरेक लम्हा भारी
सब ओर एक शख्स तारी .
जिसने खुद कभी प्रेम प्याला चखा नहीं
वो इसके तिलिस्म को जान सकता नहीं
जादू है इसमें कुछ जो नज़र आता नहीं
किताबों में पढ़ने से इसका सबक आता नहीं

सच में .....
प्रेम ,आस्वाद है.....
जिसे खुद चखे बिना नहीं जाना जा सकता .

Wednesday, September 5, 2012

सुनो न ..




तुम ,
कुछ कहो न कहो..
कुछ लिखो न लिखो
मुझे वो सारे हुनर आते हैं
जिनसे
तुम्हारी आँखों से होकर
मैं मन तक पहुँच जाती हूँ
और सब अनकहा ...सुन आती हूँ.
सब अनलिखा ...पढ़ आती हूँ .

अब तो कभी नहीं कहोगे न ..
कि "कुछ नहीं हुआ "
"पता नहीं "कह कर नहीं टालोगे
या ...बस,"ऐसे ही "कह कर बहलाओगे नहीं .

Tuesday, September 4, 2012

सड़क




सड़क : खत्म हो जाती हैं यकीनन वहाँ
तुम मेरा हाथ छोडोगे जहां ..
मेरे हमसफ़र !!

सड़क : सब पहुँच जाते हैं उससे होकर
कहीं न कहीं
कभी न कभी
वो रह जाती है ,बस
वहीं की वहीं .

सड़क : थक जाती है सारा दिन
लोगों के कोलाहल से
सन्नाटा पसरता है
चाहती है ये भी
कमर सीधी कर के
आराम करना .

सड़क : बाँट क्यूँ देते हो मुझे
डिवाइडर बना कर
एक मैं ...
दो हिस्से
एक ले जाने वाला कहीं
एक ले आने वाला वहीं

सड़क : पत्थर ,गिट्टी
कोलतार ,मिट्टी
रोड रोलर से दबा दिए
तब भी उभर उभर आती है
गिट्टियां ..
संग चली आती हैं
चप्पल में चिपक कर
तेरी याद सी ढीठ है
ये गिट्टियां भी .

सड़क : हादसों को रोज़ देखती हैं
खून और आंसू समेटती हैं
जब भीड़ तमाशबीन होती है
चाहती है...काश
मोबाइल जो वहाँ गिरा है
उसे उठा मरने वाले के
किसी दोस्त को फोन लगा दे.

सड़क : रेगिस्तान की
सारे समय
रेत से ढकी
अपने किनारों को ढूँढती सी
जो खो गए रेत में .
पर ,वो खुश है रेत में यूँ गुम होकर .

सड़क:मानचित्र में
कहाँ है वो सड़क
जो तुम्हें मुझ तक लाएंगी .
उसके बाद मानचित्र की सारी सडकें
गायब हो जाएँ ,बस .

सड़क: तुम इनसे ही गए हो दूर
मेरे लिए ये हाथ की
वो काली रेखा है
जो मेरी पत्री से
ज़मीन पे उतरी है .

(प्रकाशित)

Friday, August 31, 2012

राहे इश्क में पहला क़दम....



ग़मों से दोस्ती का मैं दम रखती हूँ
राहे इश्क में पहला क़दम रखती हूँ

खुदा की नेमत सी लगे है ये दुनिया
यही सोचकर शिकायत कम रखती हूँ

बिछड के सूख न जाए प्यार की बेल
आज तलक तेरी यादें नम रखती हूँ

किसी एक दिन तुम हो जाओगे मेरे
दिल के कोने में ये भरम रखती हूँ

लोगों को चाहिए मौक़ा हँसने का
इसी से छिपा के अपने गम रखती हूँ"

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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