पुराने प्रेम पत्र......
सारा बीता वक्त
ला कर के खड़ा कर देते हैं
आँखों के सामने
टाइम मशीन के जैसे.
डर लगता है कि
कहीं उन्हें खोलते ही
दिल में छिपा हुआ.... सब
सबके आगे ...आ गया तब .
सुना नहीं होगा न
कि किसी के बीच में होने से
कोई हो जाता है करीब.
है तो है अजीब
पर...सच यही है.
कुछ शब्द .....
जो हमने लिखे
हमने जिए
साथ साथ होने के
एक दूसरे को साक्षी मान
वो छिपाते रहे सबसे
जबकि
साथ होने के वो शब्द
जो औरों ने लिखे
वो मन्त्र हो गए .
मंत्रोच्चार ,अग्नि ,देवता
हमारे बीच होते
तो हम होते करीब
क्यूंकि
इनकी मौजूदगी के बिन
हम साथ नहीं हो सकते ,कभी .
ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर....
ReplyDeleteपहली बार आना हुआ आपके ब्लॉग पर ,देखकर अच्छा लगा बढियां रचनाएं पढने को मिलेंगी |बहुत ही भावपूर्ण है प्रेम पत्र,सुंदर |
ReplyDeleteस्वागत है...उम्मीद है कि आगे भी आपको निराशा नहीं होगी
Deleteसच है ... समय को न सिर्फ रोकते हैं ... बल्कि सामने ला खड़ा करते हैं प्रेम पत्र ...
ReplyDeleteसुन्दर रचना है ... मन में उतरती हुई ...
तहे दिल से शुक्रिया!!
Deleteसुपर हिट हिँदी ब्लाँग आपका हैँ ।
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