सच कहना रुकता है क्या ...कुछ
किसी के होने से या न होने से .
कहीं कुछ नहीं थमता
वैसे ही है चलता रहता
अच्छा है जितनी जल्दी
आ जाएँ बाहर ...इस गफलत से
कि फर्क पड़ता है किसी को
हमारे होने या न होने से
साथ जीने मरने की कसमें खाना ...
....अलग बात है
या कह लो सिर्फ बात है.
साथ साथ लोग जी सकते हैं
साथ मरते भई मैंने तो किसी को नहीं देखा.
साथ मरते किसी को नहीं देखा .... सटीक ... आज प्रेम के रंग से अलग फलसफा ...
ReplyDeleteप्रेम का ही पहलू है ...यह भी
Deleteसच कहा.....
ReplyDeleteआप किसी के साथ जी सकते हैं...किसी के साथ मरते नहीं...
अनु
बिलकुल,अनु.
Deleteवाह !!!!! बहुत शानदार अभिव्यक्ति !!
ReplyDeleterecent post: रूप संवारा नहीं...
धन्यवाद!
Deleteबेहतरीन...
ReplyDeleteथैंक्स!!
Deleteआभार!!
ReplyDeleteहार्दिक धन्यवाद!!
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