जब तक हम तुम
एक दूसरे में गुम
एक दूसरे को खोजते रहे
रिश्ते को जीते रहे
जैसे ही मान लिया
कि
एक दूसरे को जान लिया
खतम होने लगा वो नयापन
शब्दों को ढूँढने लगे
बातों में ढलने लगे
अभी तक जिस रिश्ते में लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं थी
अनकहा पढ़ने की सुन लेने की आदत हो गयी थी
धडकनों को सुन ,आँखों को पढ़ सब जान लेते थे
कुछ भी हुआ हो सारी सच्चाई पहचान लेते थे
अब......
लफ़्ज़ों की दरकार हुई
सारी मेहनत बेकार हुई
उसी ढर्रे पे चल पड़े
अजनबी से हो चले.
अभी तक जिस रिश्ते में लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं थी
ReplyDeleteअनकहा पढ़ने की सुन लेने की आदत हो गयी थी
धडकनों को सुन ,आँखों को पढ़ सब जान लेते थे
कुछ भी हुआ हो सारी सच्चाई पहचान लेते थे
अब......
लफ़्ज़ों की दरकार हुई
सारी मेहनत बेकार हुई
उसी ढर्रे पे चल पड़े
अजनबी से हो चले.... यही होता है सार
हम्म ...यही होता है,सार.
Deleteअच्छी रचना
ReplyDeleteबहुत सुंदर
थैंक्स .
Deleteशायद यही होता है
ReplyDeleteऐसा ही होता है.
Deleteहम्म्म्मसारा
ReplyDeleteकुछ किया धरा इन शब्दों का है...भावनाओं को झुठलाने जो लगें हैं ये...
सुन्दर!!!!
अनु
हाँ,अनु .....सब किया धरा इन शब्दों का ही होता है,अधिकतर.
Deleteशब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
ReplyDeleteधन्यवाद.
Deleteभावों से नाजुक शब्द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........
ReplyDeleteतहे दिल से शुक्रिया .
DeleteBadiya pankti.
ReplyDeleteशुक्रिया .
Deleteबहुत सुंदर निधि जी ..बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर ...
ReplyDeleteसुमन ..मुझे निधि कहो...अच्छा लगेगा.
Deleteआगे भी यूँ ही अच्छा लगे...मेरी कोशिश रहेगी
behad sukoon se bhara hua hai aapka lekhan
ReplyDeleteतहे दिल से शुक्रिया
Deleteशब्द कहाँ कह पाते हैं हमारी भावनाएं .....आँखों की... स्पर्श की ...मौन की ज़ुबान पढ़कर देखो न
ReplyDeleteअक्सर, मौन मुखरित होता है...बड़े खूबसूरत लम्हे होते हैं,वो.
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