Wednesday, August 29, 2012

बनी रहे ....



हसरत है कि मेरे शहर में ये शराफ़त बनी रहे
बहू -बेटी किसी की भी हों उनकी अस्मत बनी रहे

मैंने कुछ भी चाहा ही नहीं कभी बस इसके सिवा
हक़ में दुआएं करने वालों की बरक़त बनी रहे

कोई कसर तूने छोड़ी कहाँ सितम ढाने में ख़ुदा
तुम बता दो किसलिए तुझपे ये अक़ीदत बनी रहे

निगाहों को,दिलों को पढ़ने का फ़न किसे आता है
इन्हें बांचना सीख लूँ बस ये लियाक़त बनी रहे

अपने ही अपनों के ख़ून के प्यासे ना हो जाएँ
दूरी इस सूरते हाल से ताक़यामत बनी रहे

तरक्क़ी पसंद हूँ मैं इसमें कोई दो राय नहीं
देहलीज़ लांघ कर निकलूँ तो भी नज़ाकत बनी रहे

बिछड़ना जो पड़ जाए नसीब से हार कर कभी हमें
ज़रूरी है हम में रस्मे ख़तो क़िताबत बनी रहे

देखा सुना बहुत सीखा नहीं कुछ प्यार के सिवा
तमाम उम्र मुझ जाहिल की ये जहालत बनी रहे

कुछ भी ग़लत होता देखें तो आवाज़ बुलंद करें
मिजाज़ में सब लोगों के बस ये बग़ावत बनी रहे

(प्रकाशित)

36 comments:

  1. वाह बहुत खूब ....बस कुछ ना कुछ करते हुए ये लिखने के भाव बने रहने चाहिए

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  2. मैंने कुछ भी चाहा ही नहीं कभी बस इसके सिवा
    हक़ में दुआएं करने वालों की बरक़त बनी रहे... आमीन

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  3. कुछ भी ग़लत होता देखें तो आवाज़ बुलंद करें
    मिजाज़ में सब लोगों के बस ये बग़ावत बनी रहे

    बेहतरीन।


    सादर

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  4. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 30-08 -2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में ....देख रहा था व्यग्र प्रवाह .

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  5. bahut sundar likha hai ...
    shubhkamnayen ..

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  6. सम्वेदनशील कविता

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  7. कुछ भी ग़लत होता देखें तो आवाज़ बुलंद करें
    मिजाज़ में सब लोगों के बस ये बग़ावत बनी रहे
    ..
    बहुत बढ़िया प्रेरक प्रस्तुति

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    1. बात तो तब है जब कोई प्रेरणा ले

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  8. बहुत खूबसूरत गजल ..... हर शेर उम्दा

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    1. तहे दिल से शुक्रिया!!

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  9. sach me bahut sundar hai ye panktiyaan

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  10. मैंने कुछ भी चाहा ही नहीं कभी बस इसके सिवा
    हक़ में दुआएं करने वालों की बरक़त बनी रहे ..

    आमीन ... आपकी दुआ कबूल हो ... आज के समय में ऐसी दुआओं की जरूरत है ...
    सभी शेर बहुत ही लाजवाब हैं ... सादगी लिए ...

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    1. सारे शेरों को पसंद करने के लिए,आभार!

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  11. देखा सुना बहुत सीखा नहीं कुछ प्यार के सिवा
    तमाम उम्र मुझ जाहिल की ये जहालत बनी रहे...:))) मैं भी ऐसा ही हूँ निधि !

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  12. निधि जी,,,इस खूबशूरत गजल के लिए बधाई,,,,,

    MY RECENT POST ...: जख्म,,,

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  13. बहुत खूब डॉ० निधि जी |उम्दा रचना |आभार

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    1. पसंद करने के लिए,धन्यवाद!

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  14. कुछ भी ग़लत होता देखें तो आवाज़ बुलंद करें
    मिजाज़ में सब लोगों के बस ये बग़ावत बनी रहे

    इस ग़ज़ल के लिए बधाई...

    आप तो ग़ज़लों की भी अच्छी फ़नकार निकली...यूं ही लिखती रहें सदा!!!

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    1. सराहने के लिए...तहे दिल से शुक्रिया!

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  15. प्रभावित करती पंक्तियाँ.... बहुत बढ़िया खूबसूरत गजल निधि जी

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    1. हार्दिक धन्यवाद!!

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  16. A very different writing style...and different subject from you!

    But as always, touched the heart.

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    1. हाँ यार एक पत्रिका में भेजनी थी एक गज़ल ...उस कारण से यह लिखी गयी.चलो,तुम्हें अच्छा लगा पढ़ कर यह जान कर मुझे अच्छा लगा .

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