Tuesday, March 27, 2012

तेरा ख्याल...




दर्द की ये सारी लकीरें
कितनी भी गहराए.........
ग़मों के ये अँधेरे
कितने भी स्याह हो जाएँ ...
तकलीफों की ये आंधियां
चाहें ,सब उड़ा ले जाएँ ....
किस्मत की बेरुखी
कितना ही परेशां कर जाए ...
पर,
जहां,जब,जिस सूरत
मेरे करीब.
तेरा ख्याल चला आता है...
..
सच कहती हूँ ,मैं .....
मेरे चारों ओर
उत्सव सा माहौल हो जाता है
खुशियाँ की न जाने कहाँ से
जैसे झड़ी सी लग जाती है
आँखों के कटोरों में
धूप उतर आती है
और इस अनमने से मन में
इन्द्रधनुष सा छा जाता है.

32 comments:

  1. बहुत सुन्दर............

    तेरा ख़याल ही काफी है
    मेरी रात को पूनम करने को.......

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  2. बहुत सुंदर रचना,बेहतरीन प्रस्तुति

    MY RESENT POST...काव्यान्जलि... तुम्हारा चेहरा.

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    1. धीरेन्द्र जी....थैंक्स!!

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  3. satya vachan nidhi ji ....sundar rachana

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  4. खुशियाँ की न जाने कहाँ से
    जैसे झड़ी सी लग जाती है
    आँखों के कटोरों में
    धूप उतर आती है

    ....लाज़वाब कोमल अहसास...बहुत सुंदर

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    1. कैलाश जी..पसंद करने के लिए शुक्रिया

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  5. मुझे नहीं मालूम मैं राधा हूँ या मीरा
    कोई गोपी हूँ या कदम्ब
    यमुना या बांसुरी ...
    जो हूँ तुमसे ही हूँ

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    1. बहुत सुंदरता से आपने अपनी बात रखी....मन प्रसन्न हो गया पढ़ के

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  6. खुशियाँ की न जाने कहाँ से
    जैसे झड़ी सी लग जाती है
    आँखों के कटोरों में
    धूप उतर आती है
    और इस अनमने से मन में
    इन्द्रधनुष सा छा जाता है....

    बस यही भाव बना रहे सदा.......!

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  7. वाह... बहुत सुंदर भाव रचना का ...

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    1. पसंद आया ...यह जान कर अच्छा लगा

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  8. मेरे चारों ओर
    उत्सव सा माहौल हो जाता है
    खुशियों की न जाने कहां से
    जैसे झड़ी सी लग जाती है
    आंखों के कटोरों में
    धूप उतर आती है
    और इस अनमने से मन में
    इन्द्रधनुष सा छा जाता है.

    ऐसा ही होता जब प्रिय का ख्याल मन में आता है...आंखों के कटोरों में...सुंदर उपमान का प्रयोग...दिल खुश होता है आपको पढ़ कर...

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    1. आप को खुशी मिलती है...अच्छा लगा पढ़ कर.शुक्रिया,सराहना हेतु.

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  9. बेहतरीन सृजन , अपने सन्देश में सफल .....बधाईयाँ जी

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    1. बहुत -बहुत शुक्रिया,जी.

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  10. जिंदगी से उम्मीद यूँ ही बरक़रार रहे ..

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    1. इसी उम्मीद पे जिंदगी कायम है.

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  11. Replies
    1. शुक्रिया....!!अपना नाम लिखते तो और अच्छा लगता

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  12. बारिशों के पानी पे जब धूप गिरा करती है ..इन्द्रधनुष होता है .....अश्कों पर जब यादों की धूप खिलती है...तो प्रीत के रंग खिलते है ...क्यूँ तुम मुझ सा सोचती हो ..हर बार मेरी बात खुद कह देती हो

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    1. मैं तेरी कहूँ ...तू मेरी सुने...सिलसिला यूँ ही चलता रहे

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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