Tuesday, September 20, 2011

टूटी चीज़


कोई चीज़ टूट जाती है
तो हम उसे फेंक देते हैं ..
उसका इस्तेमाल छोड़ देते हैं .
वैसा ही कुछ हुआ मेरा साथ
जो तुम पर था मेरा विश्वास
तोड़ा गया वो तुम्हारे ही हाथ.
पर,
टूटने के बाद भी
मैं न तो छोड़ पायी तुम्हें
ना ही फेंक पायी विश्वास को
दूर कहीं,बेकार जान के .

मैंने सच्चे दिल से चाहा
कि...
यकीन कायम हो,फिर से .
उसे मरता न देखूं बुझे हुए मन से .

जुड जाए...
जैसे,
टाँके लगा कर भर दिए जाते हैं घाव
कुछ वक्त बाद ....
निशाँ भले ही रह जाए देह पर
पर टाँके जज़्ब हो जाते हैं .
वैसे ही ...
स्नेह के टांकों से जोड़ते हैं यकीन को,
क्यूंकि,मेरी चाहत बस इतनी सी है
कि हमारा रिश्ता ऐसा हो
जिसमें जुड़ने की सदा गुंजाइश हो .

27 comments:

  1. ओह …………बहुत ही प्यारी सी ख्वाहिश है मगर यही ख्वाहिश तो पूरी होने मे एक उम्र तमाम हो जाती है।

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  2. हाँ..यह तो सही कहा वंदना .

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  3. क्या बात
    आपका शब्द कौशल कमाल का है
    बहुत नर्म अहसासों की कविता लिखती है आप निधि जी

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  4. आपकी लेखनी और सोच का जवाब नही!

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  5. संजय जी..हार्दिक धन्यवाद !!मेरी सोच और लेखनी को सराहने हेतु.

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  6. बहुत ही मासूम ख्वाहिश, जो मन को छू जाती है..बहुत प्रभावी अभिव्यक्ति

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  7. बहुत भी खुबसूरत रचना....

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  8. आपकी चाहत सुन्दर है,सार्थक है.सदा जुडने की गुंजाइश अभूतपूर्व
    है.यही जीवन का लक्ष्य होना चाहिये.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आपका इंतजार है,निधि जी.
    भक्त भी तो परमात्मा से जुड़े रहने की ही
    चाहत रखता है.

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  9. vishwaas kee aisi chahat kam dekhne ko milti hai ...

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  10. कैलाश जी ...आपका हार्दिक धन्यवाद .

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  11. सुषमा .....शुक्रिया!!

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  12. राकेश जी...मैं आज अवश्य आऊँगी...आपको अब दोबारा नहीं कहना पड़ेगा ...पोस्ट को पसंद करने हेतु आभार

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  13. रश्मिप्रभा जी....विश्वास की यह ताकत न हो तो कोई भी रिश्ता कैसे चलेगा?

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  14. बढिया है,
    बहुत सुंदर

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  15. स्नेह के टांकों से जोड़ते हैं यकीं को ...वाह क्या बात है बधाई हो

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  16. महेंद्र जी...तहे दिल से शुक्रिया!

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  17. सुनील जी...सदा जोड़ने की कोशिश ही अच्छी है..और इस जुड़ाव हेतु विश्वास से बेहतर क्या होगा

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  18. नागेश जी...ब्लॉग पर आने,रचना को पढ़ने एवं सराहने हेतु...धन्यवाद

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  19. कुमार..साथ बने रहने के लिए ,आभार.

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  20. मैंने सच्चे दिल से चाहा, की , यकीं कायम हो फिरसे उसे मरता न देखूं , बुज़े हुवे मनसे......
    ये जरूर हो सकता है , शायद आप को याद होगा सबसे पेहली बात चित हमारे बीच ट्रस्ट पे हुवी थी . किसे ने किसी पर किसी भी बात के लिए हमें एक बार तो विश्वास करना ही पड़ेगा . एक बात जरूर है मन , मोती और शीशा टूट जाने पर , जोड़ ने पर दरार जरूर रेहती है फिर भी जब बहोत मुश्किल हो, वैसे हालत में भी हमें पारदर्शक , साफ़ और सच्चाई के साथ पेश आना है . आप अपनी गलतियाँ को पेहचाने, उनके लिए ज़िम्मेदारी ले और माफ़ी की चाहत रखे , जरूत पड़े माफ़ करने की तैयारी भी रखे . भूतकाल पे नज़र डालें, सच और जूठ का विश्लेषण करे फिर आज की परिस्थितियां को सुन्दरता से सुलझाये . जो आप को चाहिए वो आपके कदमों में होगा .The Only relationship in this world that have been worthwhile and enduring have been those in which one person could trust another and try to treat people that way...if they know you Trust or care, it brings out the best in them

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  21. ... खूबसूरत ख्याल और बयान है निधि ...

    इसमें उनकी क्या खता कि ऊब गए इस दिल से
    कोई कब तलक खेले भला एक ही खिलौने से

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  22. नयंक जी..एक बार पुनः आपके इस सुन्दर कमेन्ट के लिए धन्यवाद !!
    बिलकुल दुरुस्त कहा,आपने टूट कर जुड़ने पे दरार अवश्य रहती है ..पर उस दरार को भी भरा जा सकता है...किसी भी रिश्ते का मूल आधार ...विश्वास ही होता है ...सभी का यही प्रयास होना चाहिए कि उसे टूटने न दें..यदि कभी गलती से टूट जाए तो माफ़ी मांगने और माफ करने में कभी भी न हिचकिचाएं .

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  23. अमित..मैं नहीं सहमत कि प्यार करने वाले दिल को खिलौना समझते हैं ...और यदि समझते है कि प्यार एक खेल है..तो उन्होंने अभी तक जाना ही नहीं कि प्यार क्या है

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  24. बेहद खूबसूरत नज़्म निधि जी !

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  25. सरोज जी...आपका आभार,पसंद करने के लिए

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