Tuesday, July 12, 2011

जीवन तुम्हारा है

तुमने ...
आज ,
एक मामूली चीज़ को
मेरे मुकाबले में लाकर खडा कर दिया .
मुझे,पूरा यकीन था कि ......
हमारे जीवन में ,
बस एक बिंदु भर की एहमियत वाली
इस चीज़ से तो पक्का मेरा वजूद जीत जाएगा.
पर,भूल गयी
ये हमारा जीवंन मेरे लिए साझा है
तुम्हारे लिए
ये तुम्हारा जीवन है
प्राथमिकताएं तुम्हारी अपनी हैं
आदतें तुम्हारी अपनी हैं
बस,
एक मैं ही अजनबी.
तुमने उस बिंदु से मेरा वजूद ढक दिया
पता नहीं,इस तरह
तुमने किसे जिताया किसे हरा दिया
पर,
मैं खुद से हार गयी
अपने दिल,प्यार,विश्वास से हार गयी
जो बार-बार टूट कर
न जाने कैसे और क्यूँ जुड जाता है
और रास्ता तकता रहता है
एक बार फिर तुम्हारे हाथ ...
...टूटने का

32 comments:

  1. आदरणीय निधि जी जी
    नमस्कार !
    वाह बेहतरीन !!!!

    भावों को सटीक प्रभावशाली अभिव्यक्ति दे पाने की आपकी दक्षता मंत्रमुग्ध कर लेती है...

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  2. मन में एक नई उम्मीद जगाती संवेदनशील पोस्ट

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  3. ओह ...बहुत मर्मस्पर्शी रचना ...

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  4. Fantastic projection of thoughts !!!

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  5. dil ke komal bhvon ko ukerne men safal badhai

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  6. निधि जी आपके अहसास कितने दार्शनिक और दिल को छूनेवाले हैं,
    इसका शब्दों में बयां नहीं कर पा रहा हूँ.
    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

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  7. कल 13/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...अंतस को छू जाती है..बहुत सुन्दर

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  9. बहुत सुन्दर...[रैनी]

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  10. संजय जी....मैं आपके कमेंट्स की प्रतीक्षा करती हूँ...इधर आप बीमार रहे...मेरे ब्लॉग पर आपकी कमी खली ...
    शुक्रिया..रचना को सराहने के लिए

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  11. संगीता जी..आपके मर्म को रचना स्पर्श कर पायी ...मेरा सौभाग्य !

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  12. ज्योति जी...थैंक्स !!

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  13. सुनील जी...तहे दिल से आपका शुक्रिया...

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  14. यशवंत जी....धन्यवाद !!

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  15. राकेश जी..प्रशंसा हेतु आभार..आपने समय निकला ,रचना को पढ़ा ,सराहा ...थैंक्स!!

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  16. रश्मिप्रभा जी....हार्दिक धन्यवाद!!

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  17. कैलाश जी...रचना मन को छू ले...यह काफी है मेरे लिए...आप का आभार!!

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  18. अमित जी...पोस्ट आपको अच्छी लगी...धन्यवाद

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  19. रेनी ......बहुत बहुत आभार !

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  20. भावमय करते शब्‍दों के साथ सुन्‍दर रचना ।

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  21. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 14-07- 2011 को यहाँ भी है

    नयी पुरानी हल चल में आज- दर्द जब कागज़ पर उतर आएगा -

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  22. क्या बात है, बहुत सुंदर

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  23. सदा...............शुक्रिया!!

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  24. महेंद्र जी....थैंक्स!!

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  25. pahli baar padha aapko bahut sunder bimb ka prayog kiya hai. yahi bimb ek vivahit jeewan ka aadhar, vishwas aur pyar hai.

    prabhavi lekhan.

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  26. ह्रदय स्पर्शी रचना ...
    बहुत सुंदर..

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  27. अनामिका...आप का स्वागत है...आपका आभार कि आपने रचना को पढ़ा एवं पसंद किया...

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  28. अनुपमा जी...बहुत-बहुत शुक्रिया !!

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  29. मर्म को छूती है आपकी प्रभावी रचना ...

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