
रेत हो जैसे
लाख कोशिशों के बाद भी
फिसलता जाता है मुट्ठी से ऐसे
की ,
लगता है सब रीत गया
पर,जब रेत पर पड़ती है फुहार
तो वो भी ठहर जाता है
मुट्ठी में .
कुछ ऐसा ही हुआ
जब ,मेरे इस रेत से जीवन में
तुम्हारे प्यार ने एक ठहराव ला दिया
वरना तो ,
ज़िन्दगी .......
बीतती जा रही थी ....बेमतलब
बिखरती जा रही थी....बेमकसद
बढ़िया।
ReplyDeleteपोस्ट पर पहली टिप्पणी हेतु,धन्यवाद!!
Deleteप्यारा एहसास..!!
ReplyDeleteतुम्हें अच्छा लगा...जान कर अच्छा लगा
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