
उसके अन्दर रह जाने का दर्द.........
जिस किसी के फाँस चुभी हो,
बस,केवल वही समझ सकता है.
ठीक उस फाँस की तरह है .......
तुम्हारा प्यार.
जो दिल में मेरे
कहीं गहरे उतर गया है
ऊपर से तो किसी को नज़र नहीं आता
पर,मुझे उसका दर्द
चुभन की टीस लगातार महसूस होती हैबिना रुके....
.............अविराम
२८ अप्रैल १९९८
Beautiifulll.....Nidhiii
ReplyDeletefeel honoured...for
Aapkii Inn Adbhut Rachnaaoonn kaa Sangrah...
thanxxx a lot......!!!!my dear frnd
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ReplyDeleteअंकुर ..........आपका कमेन्ट मेरे ब्लॉग पर किया गया पहला कमेन्ट है...........बहुत शुक्रिया
ReplyDeleteयह फांस भी न ... खूबसूरती से लिखा है
ReplyDeleteशुक्रिया..............यशवंत !
ReplyDeleteसंगीता जी......आभार!!
ReplyDeleteये फांस तो अच्छी लग रही है ...
ReplyDeleteरेखा...आपको अच्छी लगी...यह काफी है मेरे लिए .
ReplyDeleteसुंदर..!!!
ReplyDeleteथैंक्स....प्रियंका!
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