Tuesday, January 25, 2011

सेतु प्यार का ..........

मेरा जीवन -नदी का एक किनारा
तुम्हारा जीवन -नदी का दूजा किनारा
मिलना चाहते हुए भी ...............
न मिल पाने की मजबूरी
झूठे अहम्  की इस बहती नदी को
मिलकर हमने पार किया
बना लिया एक सेतु प्यार का ..........
इस किनारे से उस किनारे तक



15 comments:

  1. आपकी इस रचना को पढ़कर आज मुझे समझ में आया क्यूँ मुझे सेतु देखना इतना पसंद है ...
    आभार इस रचना के लिए ...
    bahut sunder rachna ..

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  2. behad kam sabdo mei aapne to sab kuch keh dia, behad sundar prastuti

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  3. अनुपमा...मुझे तो लगता है हरेक समझदार इंसान को सेतु पसंद आते होंगे..दीवारें बांटती हैं..सेतु जोड़ देते हैं.आपका धन्यवाद!!कमेन्ट करने के लिए

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  4. यशवंत...थैंक्स!!

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  5. गीता ..आपने पोस्ट को पसंद किया..जान कर मुझे अच्छा लगा .

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  6. संगीता जी...मेरी रचना को शामिल करने के लिए ..आपका आभार

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  7. मन के किनारे भी सेतु से जुड जाते हैं ..अच्छी प्रस्तुति

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  8. वाह बहुत बढिया।

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  9. वाह ...बहुत खूब ।

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  10. वंदना ....आपका आभार,लगातार साथ बने रहने के लिए

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  11. सदा...तहे दिल से शुक्रिया !!

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  12. काश..ऐसा हो जाए हर रिश्ते में..!!

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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