गुलाबी सर्दियों की
ये सर्द सुबहें और रातें
साथ ले कर आती हैं
कितनी सारी यादें .
तेरी यादों की गर्माहट
जो धूप बन सहलाती है
वही शाम होते होते
मेरे गले लग कर
रोती हैं रात भर
और भोर होते ही
ओस लुटाती हैं.
ज़िन्दगी एक किताब सी है,जिसमें ढेरों किस्से-कहानियां हैं ............. इस किताब के कुछ पन्ने आंसुओं से भीगे हैं तो कुछ में,ख़ुशी मुस्कुराती है. ............प्यार है,गुस्सा है ,रूठना-मनाना है ,सुख-दुःख हैं,ख्वाब हैं,हकीकत भी है ...............हम सबके जीवन की किताब के पन्नों पर लिखी कुछ अनछुई इबारतों को पढने और अनकहे पहलुओं को समझने की एक कोशिश है ...............ज़िन्दगीनामा
कुछ रातों के आदत होती है ओस लुटाने की ...
ReplyDelete:-(
Deleteबहुत सुन्दर निधि
ReplyDeleteगुनगुनी सी रचना....
अनु
थैंक्स !!
Deleteयादों की गर्माहट ऐसी ही होती है :)
ReplyDeleteहम्म...सब कुछ गरमा देती है...गुनगुनी यादें.
Deleteशुक्रिया!
ReplyDeleteसुंदर रचना ...कोमल भाव सँजोये हुये
ReplyDeleteपसंद करने के लिए,आभार!
Deleteभई वाह ...बहुत खूब
ReplyDeleteथैंक्स!!
Deletebehtreen rachna...
ReplyDeleteपसंद करने के लिए:-)
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