Monday, November 26, 2012

सर्दी



गुलाबी सर्दियों की
ये सर्द सुबहें और रातें
साथ ले कर आती हैं
कितनी सारी यादें .

तेरी यादों की गर्माहट
जो धूप बन सहलाती है
वही शाम होते होते
मेरे गले लग कर
रोती हैं रात भर
और भोर होते ही
ओस लुटाती हैं.

14 comments:

  1. कुछ रातों के आदत होती है ओस लुटाने की ...

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  2. बहुत सुन्दर निधि
    गुनगुनी सी रचना....
    अनु

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  3. यादों की गर्माहट ऐसी ही होती है :)

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    1. हम्म...सब कुछ गरमा देती है...गुनगुनी यादें.

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  4. सुंदर रचना ...कोमल भाव सँजोये हुये

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    1. पसंद करने के लिए,आभार!

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  5. भई वाह ...बहुत खूब

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  6. Replies
    1. पसंद करने के लिए:-)

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मेरी राह के हमसफ़र ....

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