Wednesday, May 16, 2012

प्रेम से खूबसूरत कुछ......नाह रे.



प्रेम को जब तक देखते हैं
दूर से ...
बहुत खूबसूरत और प्यारा लगता है ..हैं न ?!
जब यह घटित हो जाता है
अपने जीवन में
तब, समझ आता है कि
क्यूँ लोग कहते थे ...
किसी को बद्दुआ देनी हो तो कह दो
उसे इश्क हो जाए.
कितनी मुश्किल है हर राह ,हर गली इसकी
कितने दर्द हैं और कितने आंसू.?
कितनी यादें हैं न जाने कितनी फरियादें हैं..
अच्छा कुछ नहीं है क्या, इसमें?

तुमने पहले ही पूछ लिया
वो...जो मैं कहने जा रही थी
कितनी भी परेशानियां हो
या कितनी भी तकलीफें
जिसको एक बार हुआ
वो कहेगा यही....
इससे खूबसूरत दुनिया में
सच्ची कुछ भी नहीं...
सच्ची-मुच्ची ....कसम से.

38 comments:

  1. प्रेम,इश्क,मुहब्त सचमुच इससे खूबसुरत अहसास दुनिया में और कोई नहीं है। यह जब होता है तो दिल...बस कहीं और ही होता है!!!

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    1. सच...प्यार से प्यारा कुछ नहीं.

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  2. पुनश्च: इसके आंसूओं की खुश्बू का तो कहना ही क्या???

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    1. आंसुओं की खुशबू....वाह!!

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  3. निधि, प्रेम तो प्रार्थना की खुशबू और खुदा की इबादत है. कैसे हम प्रेम में उस खुदा को ही भूल जाते है, खुदा के पहले उसका नाम हमारी साँसों में शिरकत करता है, हर पल हर क्षण...ता उम्र! यही प्रेम है.
    बद्दुआ नहीं, खुदा की नेमत है जो एक बार करे वो जिंदगी भर मुस्कुरा कर दिल में खुदा के लिए और इज्जत भर कर जीता है.

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    1. तुम बात नहीं समझीं ,शायद.....मैंने यह कहा कि ..अगर किसी को कभी बद्दुआ देनी हो तो इससे खूबसूरत सज़ा कोई नहीं है कि उसे प्यार हो जाए....प्यार खूबसूरत है..खुदा की नेमत है..पर उसके साथ ही साथ उसमें दर्द हैं..आंसू भी हैं .

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    2. mei samjhi hu Nidhi...Ishq ka dard ishq sa hi sundar hai.

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    3. यकीनन..प्यार के सारे दर्द...सब आंसू...बेहद खूबसूरत हैं...
      वो सब भी प्यार से ही प्यारे हैं.

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  4. जब यह घटित हो जाता है
    अपने जीवन में
    तब, समझ आता है कि
    क्यूँ लोग कहते थे ...
    किसी को बद्दुआ देनी हो तो कह दो
    उसे इश्क हो जाए..

    लोग दुआ के रूप में बददुआ दे देते हैं चुपके से.....इसी तरह....!!

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    1. पूनम......दुआ के रूप में बद्दुआ .

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  5. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 17 -05-2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में ....ज़िंदगी मासूम ही सही .

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    1. आपका बहुत-बहुत आभार!!

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  6. hahaha.. bahut achhi kavita.. mazaa aa gaya... sacchi mucchi, kasam se!! :)

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  7. यह बद्दुआ ही असल ज़िन्दगी का पाठ्यक्रम है ...

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  8. इसमे क्या शक है इससे सुन्दर कुछ नही।

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  9. वाह ...बहुत खूब।

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  10. उफ्फ्फ्फ़ ...बड़ा दुःख दियों इस प्रेम ने ...

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    1. सच्ची ....बहुत दुःख हैं...बड़े दर्द हैं.....

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  11. हर एक पंक्तियाँ अद्भुत सुन्दर है जिसे आपने बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया है!

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  12. किसी को बद्दुआ देनी हो तो कह दो
    उसे इश्क हो जाए.....


    ओह! इस दुनिया में किसी को इश्क ना हौवे मौला....
    सुंदर रचना...
    सादर

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    1. जी.....इस दुनिया में किसी को इश्क ना हौवे मौला.... शुक्रिया!!

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  13. प्रेम को सच्ची तस्वीर बताती प्रेरक रचना
    आसां नहीं है डगर पनघट की ..

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    1. बहुत कठिन है..........

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  14. जीवन में जिसने प्रेम पाया वह संतोष के साथ भाव-स्तर पर जीवन व्यतीत करता है। उसके कथनी-करनी में अन्तर नहीं होता और वह निरन्तर सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

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    1. आपसे सहमत हूँ....

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  15. प्रेम एक ऐसी मीठी कशक है जिस से उम्र भर छुटकारा नहीं चाहते...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  16. अच्छा चित्रण किया है आप ने...सुन्दर प्रस्तुति... बहुत बहुत बधाई...

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    1. प्रसन्न जी....बहुत आभार!!

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  17. प्यार की खुबसूरत अभिवयक्ति....

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    1. सुषमा .....थैंक्स !!

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  18. :-) निश्चल भावना मे डूबी हुई और सरल शब्दों में लिखी हुई हमेशा मन को छूती है।

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    1. बस अपना लिखा मन को छूता रहे...यह काफी है.

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