Thursday, May 3, 2012

बी प्रैक्टिकल ....


कभी कभी पता होता है
कि कुछ भी नहीं शेष है उस सम्बन्ध में
फिर भी ...
दिल से यह जानते हुए भी
हम मानना नहीं चाहते .

तुम भी समझाते हो अक्सर
फोन पर बार-बार दोहरा कर
ज़िंदगी ऐसे नहीं चला करती
समझा करो...बी प्रैक्टिकल .
बताओ न..
इतनी प्रैक्टिकैलिटी कैसे लाऊं?
कहाँ से लाऊं....?
पिछला सब भूल जाऊं,
और नए में रम जाऊं .

प्रैक्टिकल होना, मतलब यही है ..
तुम्हारी निगाह में न
कि मैं बिना शिकायत करे जियूं
तुम्हारे पास हूँ जब तुम चाहो
वरना मैं दूर रहूँ .
मुस्कुराऊं क्यूंकि इससे लोग सवाल नहीं करते
उनके दिमागों में मुझे तुम्हे लेकर
शक के कीड़े नहीं पलते.

मैं कोशिश कर रही हूँ
बिलकुल सिंसेयर्ली
प्रैक्टिकल होने की
अपने असली मनोभाव छुपाने की
और यूँ ही जीते जाने की .
कामयाब होउंगी या नहीं पता नहीं .
अच्छा इस कोशिश में मेरी कामयाबी के लिए
चलो,दुआ करते हैं....
जोड़ो न...
अपनी एक हथेली ..मेरी हथेली से .

24 comments:

  1. अच्छा इस कोशिश में मेरी कामयाबी के लिए
    चलो,दुआ करते हैं....
    जोड़ो न...
    अपनी एक हथेली ..मेरी हथेली से .

    बहुत बढ़िया प्रस्तुति, सुंदर अहसासों की रचना,.....

    MY RECENT POST.....काव्यान्जलि.....:ऐसे रात गुजारी हमने.....

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  2. अब तक जितनी रचनाओं से गुजरी हूँ , उसमें एक कतरे आंसू के साथ बुनियादी मासूम ज़िद है प्यार की

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    1. सही कहा आपने रश्मि जी....निधि के हर शब्द में आंसूं के साथ एक जिद है...एक प्यारी मगर बहुत दर्दभरी जिद. उम्मीद की किरणें भी झांकती है मगर नन्ही सी.

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    2. रश्मि जी....जिद तो है...बेशक !!

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    3. शेफाली...कुछ जिदें बस जिदें बन कर ही रह जाती है..जैसे कुछ उम्मीदें सारी ज़िंदगी उम्मीदें ही रह जाती हैं.

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  3. बहुत प्रेक्टिकल कविता लिखी है ..... सुंदर प्रस्तुति

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  4. निधि.....इस कविता ने मेरी आखों में आंसूं ला दिए!

    क्यों नहीं वो, वो बन जाता जो हमारा मन चाहता है....क्यों हम किसी के लिए प्रेक्टिकल जो जाये? कोई हमारे लिए जरा नॉन- प्रेक्टिकल नहीं हो सकता?

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    1. तुम्हें फिर रुला दिया,मैंने.यही प्रश्न मेरा भी है...क्यूँ हम ही बदलें ,खुद को?
      ज़रूरी है क्या हमेशा बंधी-बंधाई लीक पे चलना ?

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  5. मैं बिना शिकायत करे जियूं
    तुम्हारे पास हूँ जब तुम चाहो
    वरना मैं दूर रहूँ .
    मुस्कुराऊं क्यूंकि इससे लोग सवाल नहीं करते
    उनके दिमागों में मुझे तुम्हे लेकर
    शक के कीड़े नहीं पलते.

    बहुत खूब....लगता है अपना ही कुछ पढ़ रही हूँ......!
    सुंदर....कहूँ या .......???

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    1. आपने यह कह दिया कि अपना कुछ पढ़ रही हूँ...मेरा लिखना सफल हो गया .

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  6. सूचनार्थ: ब्लॉग4वार्ता के पाठकों के लिए खुशखबरी है कि वार्ता का प्रकाशन नित्य प्रिंट मीडिया में भी किया जा रहा है, जिससे चिट्ठाकारों को अधिक पाठक उपलब्ध हो सकें। 

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    1. यह तो सच ..एक खुशखबरी है.बधाई एवं शुभकामनायें!!

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  7. अच्छा इस कोशिश में मेरी कामयाबी के लिए
    चलो,दुआ करते हैं....
    जोड़ो न...
    अपनी एक हथेली ..मेरी हथेली से .

    बहुत ही मासूम सी रचना………आखिर कितना प्रैक्टिकल बने कोई?

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    1. सच्ची..प्रैक्टिकल होने की भी एक सीमा होती है

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  8. प्रैक्टिकल होना, मतलब यही है ..
    तुम्हारी निगाह में न
    कि मैं बिना शिकायत करे जियूं
    तुम्हारे पास हूँ जब तुम चाहो
    वरना मैं दूर रहूँ .

    वाह...कितना बड़ा सच लिखा है आपने

    नीरज

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    1. कुछ लोग हैं जिनके लिए प्रैक्टिकैलिटी का यही मतलब होता है

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  9. चलो,दुआ करते हैं....
    जोड़ो न...
    अपनी एक हथेली ..मेरी हथेली से . ............

    बहुत खूबसूरत भाव ......बहुत खूब

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    1. तहे दिल से शुक्रिया !!

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  10. एक तरफ़ा हो के जीना आसान नहीं होता ... इसे प्रेक्टिकल होना नहीं कहते ...
    रिश्तों की कशमकश कों बाखूबी लिहा है आपने ...

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    1. बात को समझने के लिए...धन्यवाद!!

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  11. प्यार अगर प्रैक्टिकल होगा भी तो भी ऐसा ही रहेगा.......

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    1. प्यार जिस जगह जाए...उसकी परिभाषा बदल देता है.

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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