Monday, May 14, 2012

छुपाना नहीं है


मिलने की बात करते हो
साथ ही साथ डरते हो..
मुझे मिलना है तुमसे वहाँ
जहां कोई डर न हो.
क्यूँ रात के अँधेरे में
सबसे छुपते छुपाते हुए ही मिलें हम ?
क्यूँ नहीं दिन के समय मिलते हम ?

क्यूँ डरते हो सबके सामने आने से
प्यार छिपाते फिरते हो ज़माने से
मुझे ,तुम भले ही ..
आसमान से चाँद तारे तोड़ के मत लाके देना
पर....
मैं तुम्हारी हूँ और तुम मेरे
यह सबके सामने
कहने की हिम्मत रखना .

मुझे सवेरा होते ही
छिपाना नहीं है तुम्हें
मुझे दिखाना है..
बताना है सबको
कि
प्यार करते हैं हम दोनों...
.......एक दूसरे से.
इसमें, पाप जैसा
या गुनाह सरीखा कुछ है क्या?
जो छुप कर ,चोरी-चोरी किया जाए .

20 comments:

  1. प्यार करते हैं हम दोनों...
    .......एक दूसरे से.
    इसमें, पाप जैसा
    या गुनाह सरीखा कुछ है क्या?
    जो छुप कर ,चोरी-चोरी किया जा

    सुंदर भाव पुर्ण अभिव्यक्ति ,...

    MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

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  2. सुन्दर, साहस प्रेम की आत्मा है!

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  3. यही साहस होना चाहिये सच्चे प्रेम मे

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    1. होना चाहिए पर होता नहीं है

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  4. मैं तुम्हारी हूँ और तुम मेरे
    यह सबके सामने
    कहने की हिम्मत रखना
    ...बहुत ही भाव पूर्ण रचना आपकी बहुत ही प्रभावशाली लगी..................आभार के साथ ही बधाई

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    1. तहे दिल से शुक्रिया!!

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  5. मैं तुम्हारी हूँ और तुम मेरे
    यह सबके सामने
    कहने की हिम्मत रखना... aisa hi hona chaiye..... behtren abhivaykti./...

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    1. होता कहाँ है ,ऐसा?

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  6. बहुत सुंदर प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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    1. हार्दिक धन्यवाद !!

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  7. सच है ... जो छुप छुपाते हो उसे प्यार नहीं कहते ... चोरी होती है वो ...
    लाजवाब लिखा है ...

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    1. जी....सहमति हेतु धन्यवाद!!

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  8. very true.....
    प्यार किया तो डरना क्या.....

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    1. प्यार किया कोई चोरी नहीं की

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  9. सही हैं ...जो डर जाएगा ...वो प्यार क्या करेगा ...

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    1. वही तो.. वो प्यार क्या ख़ाक करेगा

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