Thursday, December 5, 2013

इश्क़ की खुमारी


हल्का हल्का सा एक नशा तारी है
और कुछ नहीं ये इश्क़ की खुमारी है

कल क्या होगा इसका भरोसा नहीं
न जाने क्यूँ उम्र भर की तैयारी है

खुश ना होना तुम उसको गिरता देख
आज उसकी तो कल तुम्हारी बारी है

ज़िंदगी है हर तरह के जायके वाली
मीठी कभी कड़वी कभी खारी है

शक़ की निगाहों को खुद से दूर रखना
वाकिफ हो यह लाइलाज बीमारी है

तेरा प्यार हो या कि तेरी नाराजगी
मुझे तेरी हर अदा जां से प्यारी है

तुम अपना हाथ मेरे हाथ में दे दो
ज़िंदगी की हरेक शै फिर हमारी है

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452
    पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत आभारी हूँ...

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  2. खुश ना होना तुम उसको गिरता देख
    आज उसकी तो कल तुम्हारी बारी है

    ज़िंदगी है हर तरह के जायके वाली
    मीठी कभी कड़वी कभी खारी है

    जिंदगी की सच्चाई को दर्पण दिखा दिया आपने -सभी शेर लाजवाब है !
    नई पोस्ट वो दूल्हा....
    latest post कालाबाश फल

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  3. आप की रचना ने वाकया कायल कर दिया ...

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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