तुमने काटी है कभी ..
एक स्याह रात ...तनहा .
वादा किया हो किसी ने
जब आने का रात में
और उसकी बाट जोहते जोहते
सूरज ने हटा दी हो अँधेरे की चादर
और समेट लिए हो सितारे
अपने आगोश में .
तुम्हारे आने का ,तुमसे मिलने का
बतियाने की उम्मीद का ...नशा
सारे नशों से ज़्यादा सर चढ के बोलता है .
इसी लिए आज सवेरे ...से
सर में दर्द है..आँखें जल रही हैं
तेरे साथ ,तेरी बात
और तेरे प्यार का,इंतज़ार का
यार...
हैंग ओवर है,मुझे .
waah! bhaut hi khubsurat....
ReplyDeleteज़हर ज़हर को काटता है...
ReplyDeleteसारा दिन भी इंतज़ार करो...नशा उतर जाएगा...
:-)
अनु
एक नशा प्यार का ....ना जाने कब उतरेगा
ReplyDeleteबहुत खूब ... इस हेन्गोवर का भी अपना ही मज़ा है ... ये नशा दुगना हो जायगा उनके आने पे ...
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण सुन्दर शब्द चयन,आभार है आपका
ReplyDeleteआज की मेरी नई रचना जो आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है
ये कैसी मोहब्बत है