तुम्हें ज़रा सा भी अंदाज़ा है क्या
कि जब तुम यूँ उदास होते हो
मेरा क्या हाल होता है
तुम्हें उस दुःख की खाई से
बाहर निकालने की हर कोशिश
जब नाकाम होने लगती
तुम्हें ज़रा सा भी अंदाजा है
मेरे पाँव भी फिसलने लगते हैं
उसी खाई की ओर .
तुम्हारी एक मुस्कान के लिए
किये गए सारे जतन
जब बेकार साबित होने लगते हैं
तुम्हें ज़रा सा भी अंदाज़ा है
कि तब अक्सर मेरी हिम्मत भी
जवाब देने लगती है .
तुम्हारे उस मन को वापस ट्रैक पे
लाने के लिए
ऑफ हुए तुम्हारे मूड को फिर से
ठीक करने के लिए
तुम्हें ज़रा सा भी अंदाजा है
अपनी हर तकलीफ किनारे रख
मुझे अपना मूड अच्छा रखने के लिए
कितनी मेहनत करनी पड़ती है .
यूँ भी ......
हम दोनों एक साथ
मूड नहीं खराब कर सकते हैं
तुम्हारी हर बात से,हर चीज़ से,हर मूड से
तुम्हारे सुख से,तुम्हारे दुःख से
मुझे फर्क पड़ता है
क्यूंकि उसी से
मेरा मूड,मेरा रवैया तय होता है .
दिल से निकली सुंदर अभिव्यक्ति ...
ReplyDeleteशुक्रिया!!
Deleteयाद है न तुम्हें ...कहा था मैंने एक बार ...कि उदासियाँ संक्रामक होती हैं ...फ़्लू की तरह
ReplyDeleteअब करो दवा दारु
संक्रामक तो होती ही हैं..जानलेवा भी होती हैं...कई बार.
DeleteNice one Nidhi.
ReplyDeleteअंदाजा तो था मूड खराब होने का
ReplyDeleteपर तेरे नजरिये ने संवार दिया मेरे होने को
बहुत खूब...
तुम्हारे सुख से,तुम्हारे दुःख से
ReplyDeleteमुझे फर्क पड़ता है
क्यूंकि उसी से
मेरा मूड,मेरा रवैया तय होता है
..........बेहतरीन रचना देने के लिए आभार निधि जी
बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ !!!
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