ये हरसिंगार के फूल
जब -जब झरते हैं
नारंगी और सफ़ेद
दोनों रंग इनके
मुझपे नशा बन चढ़ते हैं
नारंगी ..
आग सा ..दहकता
तुम्हारी याद दिलाता है
तुम और तुम्हारा प्यार
आँखों के आगे आ जाता है
सफ़ेद..
शांत सी पंखुरियाँ
मेरी लाज की बेडियाँ
ढेरों अनकही बतियाँ
न जाने कितनी मजबूरियां
मेरी जनी ..हमारी दूरियां
हर रोज रात के ..
उस घुप्प अँधेरे में
फूलता है,महकता है..
ज़िंदा होता है हमारा साथ.
सवेरा होते ही
हो जाता है हकीकत से रूबरू
झरने को अभिशप्त ....
हरसिंगार सा हमारा प्यार.
(प्रकाशित)
हर रोज रात के ..
ReplyDeleteउस घुप्प अँधेरे में
फूलता है,महकता है..ज़िंदा होता है हमारा साथ.,,
सुंदर भावपूर्ण रचना,,
recent post : बस्तर-बाला,,,
बहुत कोमल अहसास..सुन्दर अभिव्यक्ति...
ReplyDeleteआभार!
Deleteबहुत खूब
ReplyDeleteथैंक्स.....!!
Deleteबहुत सुन्दर...
ReplyDeleteझरा सा..महका सा...तुम्हारा प्यार और वो ....
<3
अनु
नवाज़िश!!
Deleteबहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteकोमल भावो की अभिवयक्ति .......
ReplyDeleteये प्यार यूं ही बना रहे ... हार सिंगार खिलता रहे ...
ReplyDeleteकोमल एहसास जिए हैं रचना में ...
हार्दिक आभार!!
Deleteलाजवाब प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
ReplyDeleteधन्यवाद!!
Deleteरंगों में प्यार.....!
ReplyDeleteरंगों से प्यार....!!!
बिलकुल...
Deleteबहुत प्यारा बिम्ब चुना है ॥सुंदर प्रस्तुति
ReplyDeleteनवाज़िश है ,आपकी
Deleteवाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.
ReplyDeleteबेहद खूबसूरत एहसास से लबालब..!!! सुंदर..
ReplyDeleteआपकी यह कविता प्रेम की उद्दात भावनाओं को प्रकट करती है
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