
तेरे वादों से गुंथा
एक धागा है
जिसमें...
मैंने तेरे इंतज़ार के मनके पिरोये हैं.
प्रेम की एक माला तैयार की है.
पहने रहती हूँ ,उसे ....सदा.
उसमें एक लोकेट है
जो मेरे दिल के करीब रहता है
तेरी तस्वीर रख छोडी है,उसमें .
मेरे नज़र बट्टू हो तुम
अब किसी की नज़र
मुझपे असर नहीं करती.
how romantic.........
ReplyDelete:-)
so nice
anu
अनु...शुक्रिया,पसंद करने और सराहने के लिए.
Delete:-) मेरे नज़र बट्टू हो तुम
ReplyDeleteअब किसी की नज़र
मुझपे असर नहीं करती.
Innocent, so loving!
प्यार बार बार नहीं होता .जब कोई चीज़ एक ही बार हो तो वो हमेशा मासूम ही रहती है .
DeletePure emotions...
ReplyDeleteहाँ वो तो हैं....!!
Deleteमेरे नज़र बट्टू हो तुम
ReplyDeleteअब किसी की नज़र
मुझपे असर नहीं करती...:)
आभार:-))
Deleteबहुत अच्छी रचना
ReplyDeleteक्या कहने
पसंद करने के लिए,धन्यवाद!!
Deleteबहुत सुन्दर ,प्यारी रचना..
ReplyDeleteदिल को स्पर्श करते भाव...
:-)
हार्दिक धन्यवाद !!
Delete:):) सुंदर
ReplyDeleteशुक्रिया!!
Deleteबहुत खूब :))
ReplyDeleteथैंक्स:-))
Deleteप्रेरक,प्रभावशाली और सुंदर रचना|
ReplyDeleteबहुत-बहुत शुक्रिया,आपका .
Deleteबहुत सुंदर ..
ReplyDeleteएक नजर समग्र गत्यात्मक ज्योतिष पर भी डालें
धन्यवाद!!
Deleteप्रेमी पर कैसा आगाध विश्वास होता है,कि उसके द्वारा बोले गए हर शब्द प्रिय होते हैं और उसके द्वारा दिए गए वचन तो सचमुच एक सूत्र का काम करते हैं,इन वचनों से जो महीन धागा बनता है,वह दो दिलों को बहुत मजबूती से बांधे रखता है और प्रेमी की यादें इस महीन धागे में मनकों के समान ही पिरोई जाती हैं और दो-दिलों की धड़कने एक होने लगती हैं। दूरियां सिमटने लगती हैं। यही तो प्रेम है। और आपने तो इस प्रेम की माला में जिस लॉकेट की कल्पना की है,उसमें भी प्रेमी की तस्वीर है। इसके लिए आपने जिस उपमा को चुना है वह भी लाजवाब है--नजरबट्टू; सचमुच जिसका प्रेम इतना दृढ़ हो उसे किसी की नजर नहीं लग सकती। बहुत प्यारी सी कविता। इस के लिए बधाइयां स्वीकार करें।
ReplyDeleteआपने बहुत विस्तार से मेरी कविता की व्याख्या की..मनोज जी..शुक्रिया...!!
Deleteइतनी गहनता से हर भाव को आपने समझा...प्रेम के विषय में लिखा .अच्छा लगा .
इन टिप्मैंपणियों में मैं भी कहीं हूं...
ReplyDeleteहाँ हैं न.....
DeleteVery Charming , I have no words, but i like the clock, can i have this clock
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