
मेरा मन होता है कि
तुमसे मिलने का ,इश्क करने का
यह फैसला,
हम दोनों ...
अपने घर की दीवार पे टंगे
इस कैलेण्डर को देख कर
न तय करें .
महीना,तारीख ,मौसम
ये कौन हैं हमारे बीच में आने वाले .
तेरा मेरा मिलना...
"हम"तय करेंगे
अपने मूड के अनुसार .
डायरियां ,कैलेण्डर जैसी चीज़ों को
अपने से परे रख कर .
आओ ना..
तुमसे मिलने का मन है
आज तुम्हें प्यार करने को
जी चाहता है ...बहुत .
(प्रकाशित)
मूड से तय करना सही है .... प्यार जो है
ReplyDeleteसहमति के लिए आभार .
Deleteबहुत खूब .... बस मूड होना चाहिए ;):)
ReplyDeleteहाँ जी........
Deleteवाह .... दिल के जज्बात जैसे यूं के त्यु उतार दिये हों कागज़ पे ...
ReplyDeleteसादी दिलकश रचना ...
आभारी हूँ
Deleteमन में उठते हुए भावों का सुंदर संम्प्रेषण,,,,
ReplyDeleteMY RECENT POST:...काव्यान्जलि ...: यह स्वर्ण पंछी था कभी...
शुक्रिया!!
Deleteसुंदर रचना एवं अभिव्यक्ति "सैलानी की कलम से" ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया की प्रतिक्षा है।
ReplyDeleteथैंक्स!!
Deleteबहुत खूब ......अपने दिल के मालिक हम खुद हैं
ReplyDeleteसही है...हम ही तो हैं मालिक अपने दिल के
Deleteबिलकुल सही डायरियां ,महीना,तारीख ,मौसम कौन होते हैं, बीच में आने वाले ... बस मूड की बात है...
ReplyDeleteचीजें मूड के अनुसार ही करनी चाहियें ....
Deleteनिधि, बेहद तड़प है इन शब्दों में...काश उनसे मूड के अनुसार प्यार करना भी उतना ही आसान होता जितना की इस तड़प, इस बेचैनी को शब्दों में ढालना.
ReplyDeleteकाश...............
DeleteAray mera comment kaha gaya Nidhi :(
ReplyDeleteस्पैम से ढूँढ लायी
Deleteसमय...जो घड़ी,दिन,महीना,कैलेंडर तय करता है,वह आदमी का बनाया हुआ समय है। यह वास्तविक समय नहीं है। जिस समय की आप बात कर रहीं हैं वह मनोवैज्ञानिक समय है...जिसमें घड़ी को देख कर भूख का समय निश्चित नहीं होता,बल्कि जीवन की प्यास और भूख के मुताबिक समय निर्धारित होता है...और प्यार की प्यास और भूख मन के अनुसार ही निश्चित होती है। ईमानदारीपूर्ण भाव-अभिव्यक्ति के लिए आप साधुवाद की पात्र हैं। बधाइयां.
ReplyDeleteमनोज जी....आप कविता की विवेचना कर देते हैं....!!अच्छा लगता है,पढ़ कर .
DeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDelete....सुन्दर और स्पष्ट भाव...!!!
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