Saturday, June 23, 2012

एक शख्स



तुम कहते हो कि
लोग आँखें पढ़ लेते हैं .
मैं एक ऐसे शख्स से
वाकिफ हूँ ....
जो,बिन मुझे देखे सब जान लेता है
कब हूँ खुश कब उदास पहचान लेता है .
मोबाइल पे मेरी आवाज़ का एक हेल्लो
और वो पूछ लेता है ....
क्या बात है आज बड़ी खुश लग रही हो
कभी वही मेरी आवाज़ और वो कहता है
क्या बात है कुछ उदास हो क्या?
मेरा इधर हेल्लो बोलना और उसका कहना
कौन सी बात से परेशां हो ,कहो तो.

मैं वही ..हेल्लो वही ,
मैं उसे दिखती भी नहीं
तब भी जानता है हाल ए दिल.
कहता भी है
मन पढ़ने के लिए ज़रूरी नहीं मिलना ज़रूरी है 
एक से दूसरे तक एहसासों का बहना .


40 comments:

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    1. सराहने के लिए ,थैंक्स!!

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  2. कल 24/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. वाह ... अनुपम भाव

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  4. मन के भावों की अनुपम प्रस्तुति

    MY RECENT POST:...काव्यान्जलि ...: यह स्वर्ण पंछी था कभी...

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  5. ्बस यही तो सच्ची अनुभूति होती है।

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  6. मन से मन का रिश्ता इतना ही गहरा होता है ...कम होता है, पर होता है

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    1. बहुत गहरे होते है.... मन के ये रिश्ते

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  7. हृदय और मन के तंतुओं में झंकृत होने वाली तरंगे बहुत तेजी से दौड़ती हैं...फिर मुख से निकले मामूली से शब्द से भी एक सहृदयी व्यक्ति उन तरंगों को पकड़ लेता है और आप के मन की दशा को समझ लेता है।

    फिर भी मैं उस शख्स से मिलना चाहूंगा, क्योंकि आजकल सहृदयी लोगों का मिलना दुर्लभ होता जा रहा है।

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    1. मेरे पास ऐसे कई लोग हैं...मनोज जी.अपने को खुशकिस्मत मानती हूँ .

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  8. मेरी टिप्पणी स्पैम में है...कृपया उसे मुक्त करें।

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    1. मुक्त कर दिया है,जी.

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  9. एक-एक शब्द भावपूर्ण ... सुन्दर कविता

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  10. पिछले कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ...

    .............रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

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    1. आप आते रहा करिये ..बस.

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  11. bilkul sahi bat....bahut bhavpurn...

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    1. सहमति हेतु शुक्रिया!!

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  12. इसे ही तो टेली-पैथी कहते हैं | बहुत खूब |

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    1. टेली पैथी ...जी हाँ.

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  13. दिल की बात दिलवाला ही जाना

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    1. दिल में रहने वाले ही दिल पढ़ पाते हैं

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  14. प्रेम कि सुंदर अनुभूती....
    बहूत सुंदर रचना,,,
    :-)

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    1. पसंद करने के लिए ...थैंक्स!

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  15. जब सम्बन्ध अंतरात्मा का हो तो कुछ भी पढ़ने या जानने की जरूरत नहीं पड़ती ...
    प्रेम की गहरी अनुभूति लिए ....

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    1. रूहानी संबंधों हों तो किसी बात की ज़रूरत नहीं होती

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  16. ये ही तो छिपी हुई जिंदगी का राज़ हैं .....मित्र कुछ समझ आए तो समझाना ज़रा

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    1. ज़िंदगी के राज़ ...बताए नहीं जाते ...महसूस करे जाते हैं

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  17. यही तो है ..सच्चा मित्र ....बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...!

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    1. हम्म...सच्चा ,अच्छा मित्र.

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  18. Replies
    1. हार्दिक धन्यवाद !!

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  19. ऐसे लोग नसीब वालों को ही मिलते हैं....

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    1. हाँ ..यह बात तो सही है

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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