Saturday, June 16, 2012

शायद ...



सही कहा तुमने ...शायद
किसी चीज़ का कोई भरोसा नहीं है
और फिर इस मुए चाँद का तो कतई नहीं
रोज तो घटता बढ़ता रहता है .

चाँद को तुम टांगना
हाथ से गोल कर .
मुझे जो जैसा है
वैसा पसंद है .
मुझे बदलाव मंजूर नहीं
काटना छांटना बस का नहीं .

किस्मत के सितारे
होते गर साथ हमारे
तो यह हाल ही होता क्यूँ
मैं उसको ,वो मुझको
खोता ही क्यूँ ????

जो मेरा है,हर हाल मिलेगा मुझे
किसी सर्च लाईट की ज़रूरत नहीं
सितारों पे यकीन की ज़रूरत नहीं
बस अपने प्यार पे यकीन है,मुझे .

दाग और चोट मिलें तो मिल जाएँ
उनसे कोई गुरेज नहीं
बस इतनी सी अरज है
कि तुम भी मिल जाओ ,कभी

18 comments:

  1. मुझे भी जो जैसा है
    वैसा पसंद है .
    मुझे बदलाव मंजूर नहीं...
    हमारे मन की बात कह दी आपने... सुन्दर अभिव्यक्ति

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  2. बहुत सहजता से कही बात ... सुंदर प्रस्तुति

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  3. मुझे जो जैसा है
    वैसा पसंद है .
    मुझे बदलाव मंजूर नहीं,,,,,

    बहुत बेहतरीन सादगी से लिखी सुंदर रचना,,,,,

    RECENT POST ,,,,पर याद छोड़ जायेगें,,,,,

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  4. कोमल भावो की सहज अभिव्यक्ति।

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  5. वाह ... बहुत ही बढिया

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  6. मुझे जो जैसा है
    वैसा पसंद है
    मुझे बदलाव मंजूर नहीं
    काटना छांटना बस का नहीं

    सरल जीवन की पहचान है इन पंक्तियों में

    लेकिन बाद की पंक्तियों में आशा और अपेक्षा का भाव है
    जिससे जीवन में सरलता खो जाती है और द्वंद्व उमगता है
    बाद की पंक्तियों में वह सादगी और सरलता खो रही है
    पर प्रिय के मिलन के लिए सहन किए जाने वाले दाग और चोट सहन करने के मौलिक भाव में पुन:
    सरलता पा ली है.

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    1. मनोज जी...जहां से शुरुआत हुई थी...अंत में उसी सरलता तक पहुँच ही गयी...भटकते भटकाते .अच्छा है ,न....अंत भला तो सब भला

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    बेहतरीन रचना


    दंतैल हाथी से मुड़भेड़
    सरगुजा के वनों की रोमांचक कथा



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ पढिए पेसल फ़ुरसती वार्ता,"ये तो बड़ा टोईंग है !!" ♥


    ♥सप्ताहांत की शुभकामनाएं♥

    ब्लॉ.ललित शर्मा
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  8. दाग और चोट मिलें तो मिल जाएँ
    उनसे कोई गुरेज नहीं
    बस इतनी सी अरज है
    कि तुम भी मिल जाओ ,कभी... वाह क्या बात है

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    Replies
    1. रश्मि जी...पसंद करने के लिए ,शुक्रिया!!

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  9. दाग और चोट मिलें तो मिल जाएँ
    उनसे कोई गुरेज नहीं
    बस इतनी सी अरज है
    कि तुम भी मिल जाओ ,कभी...खुबसूरत अल्फाजों में पिरोये जज़्बात....शानदार |

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