Saturday, September 28, 2013

यूँ धोखा नहीं देता



अपने को हंसी में छिपा दर्द का तोहफा नहीं देता
तुम मिल जाते तो मैं खुद को यूँ धोखा नहीं देता

जितनी बार कोई मेरे क़रीब आया बिछड़ गया
क्यूँ ख़ुदा मेरे हक़ में कभी फैसला नहीं देता

हर शख्स़ चाहता है अब एक तजुरबेकार आदमी
इसलिए ही नए को कोई भी मौक़ा नही देता

मैंने जितना चाहा गर वो उतना ही चाहता मुझे
तो यकीनन जो उसने दिया वो फासला नहीं देता

नेता रोज ढूँढ़ते रहते हैं कुछ अलग बात कहने को
पर आजकल देश उन्हें कोई नया मसला नहीं देता

कहता रहता है मुझसे कि मेरी तरक्की चाहता है
पर न जाने क्यूँ आगे बढ़ने को रास्ता नहीं देता

16 comments:

  1. कहता रहता है मुझसे कि मेरी तरक्की चाहता है
    पर न जाने क्यूँ आगे बढ़ने को रास्ता नहीं देता

    ............खूबसूरत बयान-ए-अंदाज़.....निधि जी

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  2. हर शख्स़ चाहता है अब एक तजुरबेकार आदमी
    इसलिए ही नए को कोई भी मौक़ा नही देता,,,,,

    वाह !!! बहुत खूब ,लाजबाब ,,,

    नई रचना : सुधि नहि आवत.( विरह गीत )

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  3. Replies
    1. सराहने के लिए आभार!

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  4. बहुत बेहतरीन....
    :-)

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  5. हर शख्स़ चाहता है अब एक तजुरबेकार आदमी
    इसलिए ही नए को कोई भी मौक़ा नही देता ..

    सच लिखा है ... शायद ये बात समझ आ जाए ओर कठिनाई कम हो जाए ...
    हर शेर भावपूर्ण है ...

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  6. Replies
    1. बहुत शुक्रिया!!!

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  7. जितनी बार कोई मेरे क़रीब आया बिछड़ गया
    क्यूँ ख़ुदा मेरे हक़ में कभी फैसला नहीं देता

    bahut khoobsurat Nidhi. Khair yeh koi nayee baat nahi, tum hamesha hi itna bhavpoorna, prem-ras mei samahit sundar likhti hun :)

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  8. bahut sundar rachna hai...
    mere blog par bhi aap sabhi ka swagat hai...
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

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