
वो जो एक अजीब सी बेचैनी है न
इस कमबख्त प्यार में
जो न कायदे से जीने देती है न मरने....
वही शायद रास आती है,मुझे
लगता है कुछ अटक सा गया है हलक में
जो यह निकला तो जान लेकर निकलेगा .
इसी जीने मरने के बीच की कवायद में
मेरा इश्क से इश्क गहराता जाता है
गले में कोई फंदा सा है
जो कसता चला जाता है .
मज़े की बात यह है
कि जब ऐसा नहीं होता
तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता.

