Sunday, February 20, 2011

यादों का फ़लसफ़ा

तुम्हारी यादों का फ़लसफ़ा
मुझे कभी समझ नहीं आया 
क्यूंकि .....................
कभी याद आती 
तो अपने साथ ख़ुशी  का अम्बार ले आती है
मेरा तन-मन प्रफ्फुलित कर जाती है
और कभी याद आती है 
तो बेबात आँख भर आती है
बेमौसम ही बरसात चली आती है  
क्यूँ ?????????????
ऐसे ,बस यूँ ही  
मूड खराब हो जाता है और कभी-कभी
अचानक ही सब ठीक हो जाता है .
ये मूड क्या है?
इसका तुम्हारी यादों से क्या नाता है 
फिर  इसका उत्तर खोजने लगी हूँ मैं  ..........   

10 comments:

  1. Bahut bhawanaatmak kriitii !!!.....Smriityon sae hee kitnaa adbhut prashna kiyaa hai..." kyaa naataa hai tumhaaraa maeree khushiiyon sae .....maeree udaasiiyon sae ???" ....par haan hai ; yeh to tayy hai !!!... Sach poochcho to yehee to saarae mamatva kaa saar hai....ye jo moh ho jaataa hai humein kissii sae....judaav saa !!! ...itnaa gahraa kii humaaree saaree bhaawnaayein....man kee saaree komaltaa....uss ek vyatktii kae chaaron or prikramaa karteen hein......jaisae dhartii apnae suraj kae chaaron or ghoomtee ho !!!.....aur uss ghoomnae mein kabhi din hotaa hai.......kabhi raat hotee hai !!!....Buss theek ussii tarah .....un smriitiiyon sae bhi.......kabhi inn aankhon mein indra dhaush khiltae hein.......kabhi saawan barastaa hai !!!...
    Isskee maatra itnaa hee rahasya hai.....maatra itnee hee sachhaayee hai !!!

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  2. आप ने बिलकुल ठीक कहा अर्चि दी .........यादें जीवन में कभी पीछा नहीं छोड़तीं ....रुलाती भी हैं....हंसाती भी हैं......उनके बिना गुज़ारा नहीं है ...........यादें उसपर निर्भर करती हैं की किस से कितना जुड़ाव है ...ये तथ्य तो झुठलाया नहीं जा सकता है .इस बार आपकी टिपण्णी की उम्मीद हमें थी पर ये आशा बिलकुल नहीं थी की इतनी जल्दी हमारे लिए आप वक़्त निकाल लेंगी ............

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  3. Inn yaadonn ke falsafey ko har baar dekh kar kuch yunn lagtaa haiii
    jaise zindagii kii daastaan kuch aur roshan hotii jaa rahii haiii......

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    1. हाँ बिलकुल अंकुर.

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  4. इतने सुंदर अल्फाजों में यादो से रूबरू कराने का शुक्रिया
    .... I am really getting nostalgic ..
    कितना दुश्वार था यादों का सफ़र
    मैंने तो सोचा था कि चुपचाप गुज़र जाऊंगा

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    1. उम्दा शेर...अमित.

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  5. Mohammad ShahabuddinFebruary 21, 2011 at 11:56 PM

    निधि: क्या खूब लिखा है तुमने..."कभी याद आती है तो ख़ुशी का अम्बार ले आती है....और कभी याद आती है तो बेबाक आँखें भर आती है..."
    तुझे क्या खबर तेरी याद ने, किस तरह से सता दिया,
    कभी ख्यालातों में हंसा दिया, कभी महफ़िलों में रुला दिया,
    कभी यूँ हुआ... तेरी याद में नमाज़ अपनी क़ज़ा हुयी,
    कभी यूँ हुआ तेरी याद ने, मुझे मेरे रब से मिला दिया ....खुश रहो और इस तरह लिखते रहो...

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    1. बहुत सुंदरता से आपने अपनी बात रखी

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  6. वाह क्या कह गए आप..

    ...

    "समझते क्यूँ नहीं यादों के साये..
    मुमकिन नहीं हर ओर ख़ुशी के फाये.!!"

    ...


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    1. कौन समझाए इन नासमझों को....

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टिप्पणिओं के इंतज़ार में ..................

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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