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ज़िन्दगी मेरी .........इक किताब |
तुम ............उस किताब का वो पन्ना
जो मुड़ा हुआ है ...उपरी किनारे पर
यह याद दिलाने के लिए
कि
किताब चाहें जहाँ से शुरू हो
या जहाँ कहीं हो ख़तम
पर अभी
जहाँ तुम हो
वहीँ से मुझे आगे बढ़ना है
और जहाँ रुकूँगी
वहाँ फिर तुम मौजूद रहोगे
कोने पे मुड़े हुए
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ... जीवन के एक सच को बखूबी शब्दाकार दिया है.... बधाई
ReplyDeleteनितींद्रजी ,आपने जो बधाई दी है उसे स्वीकार करती हूँ.......साथ ही आपने पोस्ट की जो प्रशंसा करी है उसके लिए आपको धन्यवाद देती हूँ की आपने पढने का वक़्त निकाला और टिपण्णी करने का भी .........
ReplyDeleteBahut uttkrisht abhivyaktii !!!....Yahee prem kaa roop hai shaayad !....Woh bina kissi sambhaashan ke prastut rehtaa hai, har pal ...apnee sampoornataa mein !!!....Humaaree iiyataa kaa aadee bhi wahee....ant bhi wahee....aur madhyaantar bhi !!!....buss ek saral...sahaj maun see upastiithii ...apnee athaah udaarataa ke saath....har kshan jeevant !!!....Aur hum jahaan jiss mod par haath badhaayeingae woh humein waheen thaam laegaa.....jaisae.....buss yahee to tayy thaa !!!
ReplyDeleteबहुत सुन्दर भाव ... ज़िंदगी के हर पन्ने पर उसका एहसास ..
ReplyDeleteबेहतरीन।
ReplyDeleteसादर
बहुत खूबसूरत जिंदगी चलने का नाम है |
ReplyDeleteसुन्दर रचना |
वो तो मुड़ गया ....कोने पर ही सही
ReplyDeleteअब भला दिल के मोड़ पर उसे ढुंढने से क्या फायदा
हाँ उसकी मौजूदगी ...हरदम रहेगी आस -पास
खुशबु के रूप में ...जिसमें मह्कोगी तुम भी ......... छूटे हुए मोड़ की तरह
khubsurat rachna
संगीता जी....तारीफ के लिए धन्यवाद .
ReplyDeleteयशवंत..आभार!
ReplyDeleteमीनाक्षी जी...ब्लॉग पर आने और रचना को सराहने के लिए शुक्रिया .
ReplyDeleteगुंजन जी ...बहुत खूबसूरत पंक्तियों से सजा दिया,आपने..मेरी पोस्ट को...धन्यवाद .
ReplyDeleteथैंक्स!!
ReplyDelete...
ReplyDelete"मेरी लय तुझसे शुरू..
तुझपे खत्म..
ता-उम्र सजेगी..
यूँ ही ये बज़्म..!!"
...
सुन्दर..!!!
ऐसा ही होता है न...प्यार में .
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