Showing posts with label धर्म. Show all posts
Showing posts with label धर्म. Show all posts

Sunday, August 19, 2012

खाप



क्लास लगी है

वहीं...बरगद के चबूतरे पर

गाँव के दद्दा सिखाएंगे

कि लड़का लड़की प्यार कैसे करेंगे .


मिलते ही...दिल के जुड़ने से पहले

पूछेंगे ...गोत्र,धर्म जाति

फिर अंदाज़ा कि

पैसे से मजबूत है की नाही .


उसके बाद प्यार करना बच्चो

वरना ,फिर सामू और कम्मो

कि तरह मरना बच्चो .

सिखा रहे हैं

पढ़ा रहे हैं पाठ ...

प्यार होना नहीं चाहिए

क्यूंकि

प्यार सब देख भाल कर ...कह सुन कर ...जांच-परख कर

करने वाली चीज़ है.

Friday, July 13, 2012

अजब प्यार



खुद ब खुद आ जाता है
बिन बुलाए ...
बिन खटखटाए ..
बिन कहे ...
बिन सुने ...
आना ही धर्म है जिसका
छा जाना ही कर्म है जिसका

अजब बदतमीज़ होता है न प्यार .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

Followers