Friday, August 28, 2015

सुनो न

यार सुनो न
एक बात कहनी है
वो जो अपने होठों पे
तुमने मुस्कान पहनी है
वो यूँ ही सजाये रखना
मैंने,
तेरे हिस्से के सारे आंसू
मांग लिए हैं रब से
एवज में दे दी हैं
अपने हिस्से की
सारी खुशियाँ और हंसी।
शर्त सिर्फ इतनी सी
दिन हो या रात हो
कैसे भी हालात हों
यूँ ही आसपास रहना
मेरे संग साथ रहना
सदा

Thursday, August 27, 2015

यायावर

यायावर हूँ
घुमक्कड़ी...काम मेरा
बेमतलब इधर उधर भटकते रहना
बिन काम के यहाँ वहाँ फिरते रहना
तेरे दिल के सिवा न घर न मकाँ मेरा

तुमसे छूटा तो फिर कहीं बंध न सका
ज़िन्दगी में इक ठौर कभी रुक न सका
भागता रहा हमेशा कहीं थम न सका
कोई चीज़ कोई बंधन मुझे कस न सका

प्यार खोया और मैं उसे ढूंढता रह गया
वो ख़त हूँ जिसका पता लापता हो गया
क्या करता यार
तेरे प्यार में पागल हुआ आवारा हो गया
तेरे दिल से निकला तो मैं बंजारा हो गया

Wednesday, August 26, 2015

तोहफे

तुम्हारी दी हुई चीज़ जब
दरकती टूटती ..
अटकती बिगड़ती ..
फिसलती छिटकती है
तो ,पता नहीं क्यों
उसे हमारे रिश्ते से जोड़ के
देखने लग जाती हूँ
इतना कुछ खो चुकी हूँ पहले
कि अब कुछ भी खोने से डरती हूँ

तुमने जो कुछ मुझे दिया है
फिर वो चाहें
मोहब्बत का एहसास हो
या ये भरोसा कि तुम पास हो
कई ख़त दुआओं से भरे हुए
या छोटे बड़े अनगिन तोहफे
अब  ,
जब कभी इनमें से
किसी को कुछ होता है
इक डर सताता है मुझे
सब बिखर जाने का

उसके बाद अक्सर मनाती रहती हूँ
मुहब्बत का कभी एक लम्हा न छूटे
तेरे प्यार पे जो है भरोसा वो न टूटे
दुआओं के ख़त में न देर हो कभी
चाहत का रंग फीका न पड़े कभी

Tuesday, August 25, 2015

अबोला


आजकल तुमसे कह नहीं पाती
दिल की कोई बात
यही वजह सब अनकहा
कागज़ पे ख़ुद चला आता है
मेरे लिखे लफ़्ज़ों में तुम हो
स्याही में घुली हर बात
बहती है खुद को कहती है

पहले तुमसे सब बोल देती थी
रीत जाती थी
अब अंदर ही अंदर घुटती हूँ
भीतर से भरी रहती हूँ
कलम से कागज़ तक का सफ़र
सिर्फ़ तुमसे अपनी कहने का
इक नया तरीका भर है

अबोला...
अच्छा है कई मायनों में
देखो न इसमें भी कुछ न कुछ
पॉज़िटिव ढूंढ लिया मैंने
हर चीज़ में कुछ अच्छा खोजना
तेरी ये बात भूली नहीं अब तक मैं
अब तक तेरी ये बात भूली नहीं मैं।

Monday, August 24, 2015

चुनाव

सारे तरीके
सब हथकंडे
पता थे उसे
कब क्या करे
जो मुझे अच्छा लगे
किस बात को न करे
कि बुरी लगती है मुझे
कैसे मुझे प्यार करे
कब मुझसे नाराज़ रहे
कहाँ दर्द होगा
क्या कहाँ कितना छुपा होगा
किधर चोट लगेगी
कैसे आंसुओं की थमी नदी बहेगी
कब होठों पे हँसी खिलेगी
किस बात पे ख़ुशी छलकेगी

पर,आजकल
वो सिर्फ और सिर्फ
वही करता है जान के
जिससे मुझे खराब लगे।
उन बातों को कहता है
जिससे मेरा जी जले
एक पल चैन न पड़े
उसकी हर बात खले

उसके तरीके उसके से निराले
अजब ढंग हैं प्यार जताने के
अब हैं तो हैं
जो है जैसा है वो
चुनाव तो मेरा है

Sunday, August 23, 2015

हो तो क्या हो?

अच्छा किसी को गर इतना चाहा जाये .....
कि प्यार में डुब कर तरना आ जाये
उसपे मर कर जीना आ जाये
इतनी दूरी हो कि क़रीब आ जाये
इतना भूलें कि वो बेहद याद आये
मैं बन जाऊं जो धरती सी
तो वो झुका आसमान लगे
इतनी कठिन हो चीज़ें
कि बाक़ी सब आसान लगे
सच्चा लगे वो इस क़दर
कि दुनिया बेईमान लगे
आस पास सारे इंसान हैं वही रहे
और वो एक शख़्स भगवान लगे
......तो हो तो क्या हो????

Saturday, August 22, 2015

सच्चाई

हार जाती हूँ हर बार
दिल दिमाग की लड़ाई में यार
दिमाग कहता है सब छोड़ के आगे बढ़ो
दिल समझाता है रुको एक मौक़ा और दो
इनकी इस खींचातानी में पिसती जाती हूँ
यूँ देखें तो इनकी कोई ख़ास गलती नहीं
सामने जब तुम आते हो
दिल दिमाग दोनों  में से
किसी की भी चलती नहीं
मेरी तरह ये फेर में पड़ जाते हैं
क्यूंकि.............
इन्होंने आज तक इतनी सच्चाई से
झूठ बोलते किसी को भी देखा नहीं

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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