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Wednesday, August 26, 2015

तोहफे

तुम्हारी दी हुई चीज़ जब
दरकती टूटती ..
अटकती बिगड़ती ..
फिसलती छिटकती है
तो ,पता नहीं क्यों
उसे हमारे रिश्ते से जोड़ के
देखने लग जाती हूँ
इतना कुछ खो चुकी हूँ पहले
कि अब कुछ भी खोने से डरती हूँ

तुमने जो कुछ मुझे दिया है
फिर वो चाहें
मोहब्बत का एहसास हो
या ये भरोसा कि तुम पास हो
कई ख़त दुआओं से भरे हुए
या छोटे बड़े अनगिन तोहफे
अब  ,
जब कभी इनमें से
किसी को कुछ होता है
इक डर सताता है मुझे
सब बिखर जाने का

उसके बाद अक्सर मनाती रहती हूँ
मुहब्बत का कभी एक लम्हा न छूटे
तेरे प्यार पे जो है भरोसा वो न टूटे
दुआओं के ख़त में न देर हो कभी
चाहत का रंग फीका न पड़े कभी

Saturday, March 30, 2013

डर



स्याह सी खामोशियों के
इस मीलों लंबे सफ़र में
तन्हाइयों के अलावा ..
साथ देने को दूर-दूर तक
कोई भी नज़र नहीं आता .

जी में आता है
कि कहीं तो एक उम्मीद दिखे
कोई तो हो हमक़दम
जिसके हाथों को थाम के चलें.
पर फिर वही डर...वही खटका
मन का ...
कि गर कोई मिल भी गया
तो..................
बीच राह में वो छोड़ कर न जाए
मुझे कुछ और खाली
कुछ और अधूरा सा
न कर जाए .

उनका क्या हो जो लोग जन्मते ही हैं ...ज़िंदगी का सारा खालीपन और उदासी अपने में समेटने के लिए .

Monday, May 14, 2012

छुपाना नहीं है


मिलने की बात करते हो
साथ ही साथ डरते हो..
मुझे मिलना है तुमसे वहाँ
जहां कोई डर न हो.
क्यूँ रात के अँधेरे में
सबसे छुपते छुपाते हुए ही मिलें हम ?
क्यूँ नहीं दिन के समय मिलते हम ?

क्यूँ डरते हो सबके सामने आने से
प्यार छिपाते फिरते हो ज़माने से
मुझे ,तुम भले ही ..
आसमान से चाँद तारे तोड़ के मत लाके देना
पर....
मैं तुम्हारी हूँ और तुम मेरे
यह सबके सामने
कहने की हिम्मत रखना .

मुझे सवेरा होते ही
छिपाना नहीं है तुम्हें
मुझे दिखाना है..
बताना है सबको
कि
प्यार करते हैं हम दोनों...
.......एक दूसरे से.
इसमें, पाप जैसा
या गुनाह सरीखा कुछ है क्या?
जो छुप कर ,चोरी-चोरी किया जाए .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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