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Wednesday, August 26, 2015

तोहफे

तुम्हारी दी हुई चीज़ जब
दरकती टूटती ..
अटकती बिगड़ती ..
फिसलती छिटकती है
तो ,पता नहीं क्यों
उसे हमारे रिश्ते से जोड़ के
देखने लग जाती हूँ
इतना कुछ खो चुकी हूँ पहले
कि अब कुछ भी खोने से डरती हूँ

तुमने जो कुछ मुझे दिया है
फिर वो चाहें
मोहब्बत का एहसास हो
या ये भरोसा कि तुम पास हो
कई ख़त दुआओं से भरे हुए
या छोटे बड़े अनगिन तोहफे
अब  ,
जब कभी इनमें से
किसी को कुछ होता है
इक डर सताता है मुझे
सब बिखर जाने का

उसके बाद अक्सर मनाती रहती हूँ
मुहब्बत का कभी एक लम्हा न छूटे
तेरे प्यार पे जो है भरोसा वो न टूटे
दुआओं के ख़त में न देर हो कभी
चाहत का रंग फीका न पड़े कभी

Wednesday, September 26, 2012

मुखौटे



वो लोग अभागे होते हैं
जिनके पास होते हैं
वो,जो...ओढ़े ही रहते हैं मुखौटे

ताउम्र.

ताउम्र.
उनके आवरणों के टाँके
कच्चे हो भले
पर,उनके मुखौटों के साथ
चेहरे की ,मन की खाल में जज़्ब हो जाते हैं.

नाटक करना ही शगल है जिनका
अंतस के भाव वो कहाँ से लायें ?
ऐसे लोगों का क्या करेगा
तुम्हारा विश्वास ...
तुम्हारा निस्स्वार्थ प्रेम .

वो विश्वास और वो प्रेम
रोयेंगे अपनी किस्मत पे
एक दिन इस्तेमाल करने के बाद
जब फेंक दिया जाएगा
उन्हें ...बेकार समझ
कतरनों के ढेर पर .
तुम अपने लिए सीखना सिलाई का हुनर ...
रखना पक्के धागे तैयार
क्यूंकि जब तुम्हारा यकीं होगा तार-तार
बखिया उखड़ेगी तुम्हारी
तो हो तुम्हारे खुद के पास
ज़ख्म सीने की सारी तैयारी .

दोबारा जीने के लिए
भरोसे को सिलने के लिए
ज़ख्मों को छिपाने के लिए
दर्द को सहने के लिए
माफी की लेस
बड़प्पन के बटन टांक देना
क्यूंकि जैसे तुम नहीं बदलोगे
वैसे ही वो भी नहीं बदलेंगे,कभी.

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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