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Tuesday, June 18, 2013

बादल


जब भी कभी

बादलों से बात हुई है.

उन्होंने यही कहा है ,हौले से

सफ़ेद रुई से हलके हम...

सबको नज़र आते हैं.

कोई नहीं समझता हमारा दर्द...

जब स्याह हो गहराता है.

तब ,बरसना हमारी खुशी नहीं..

तेरी मेरी दुआ का असर नहीं..

मोर की पुकार नहीं...

चकोर की प्यास नहीं..


बल्कि

अंतस की तकलीफ का बह जाना मात्र है.

Saturday, March 30, 2013

डर



स्याह सी खामोशियों के
इस मीलों लंबे सफ़र में
तन्हाइयों के अलावा ..
साथ देने को दूर-दूर तक
कोई भी नज़र नहीं आता .

जी में आता है
कि कहीं तो एक उम्मीद दिखे
कोई तो हो हमक़दम
जिसके हाथों को थाम के चलें.
पर फिर वही डर...वही खटका
मन का ...
कि गर कोई मिल भी गया
तो..................
बीच राह में वो छोड़ कर न जाए
मुझे कुछ और खाली
कुछ और अधूरा सा
न कर जाए .

उनका क्या हो जो लोग जन्मते ही हैं ...ज़िंदगी का सारा खालीपन और उदासी अपने में समेटने के लिए .

Sunday, February 24, 2013

हैंग ओवर


तुमने काटी है कभी ..
एक स्याह रात ...तनहा .
वादा किया हो किसी ने
जब आने का रात में
और उसकी बाट जोहते जोहते
सूरज ने हटा दी हो अँधेरे की चादर
और समेट लिए हो सितारे
अपने आगोश में .

तुम्हारे आने का ,तुमसे मिलने का
बतियाने की उम्मीद का ...नशा
सारे नशों से ज़्यादा सर चढ के बोलता है .
इसी लिए आज सवेरे ...से
सर में दर्द है..आँखें जल रही हैं
तेरे साथ ,तेरी बात
और तेरे प्यार का,इंतज़ार का
यार...
हैंग ओवर है,मुझे .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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