जब भी कभी
बादलों से बात हुई है.
उन्होंने यही कहा है ,हौले से
सफ़ेद रुई से हलके हम...
सबको नज़र आते हैं.
कोई नहीं समझता हमारा दर्द...
जब स्याह हो गहराता है.
तब ,बरसना हमारी खुशी नहीं..
तेरी मेरी दुआ का असर नहीं..
मोर की पुकार नहीं...
चकोर की प्यास नहीं..
बल्कि
अंतस की तकलीफ का बह जाना मात्र है.
