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Monday, August 24, 2015

चुनाव

सारे तरीके
सब हथकंडे
पता थे उसे
कब क्या करे
जो मुझे अच्छा लगे
किस बात को न करे
कि बुरी लगती है मुझे
कैसे मुझे प्यार करे
कब मुझसे नाराज़ रहे
कहाँ दर्द होगा
क्या कहाँ कितना छुपा होगा
किधर चोट लगेगी
कैसे आंसुओं की थमी नदी बहेगी
कब होठों पे हँसी खिलेगी
किस बात पे ख़ुशी छलकेगी

पर,आजकल
वो सिर्फ और सिर्फ
वही करता है जान के
जिससे मुझे खराब लगे।
उन बातों को कहता है
जिससे मेरा जी जले
एक पल चैन न पड़े
उसकी हर बात खले

उसके तरीके उसके से निराले
अजब ढंग हैं प्यार जताने के
अब हैं तो हैं
जो है जैसा है वो
चुनाव तो मेरा है

Tuesday, May 8, 2012

आखिरी बार


दो लोग जब प्यार में होते है
तो हर कुछ दिन बाद
ऐसा कुछ ज़रूर होता है
जिसके कारण ..नाराज़ हुआ जाता है
कहा सुनी हो जाती है
और आखिर में तय किया जाता है कि
ठीक है एक दूसरे को नहीं सुहा रहे
तो तुम अपने रस्ते...मैं अपने रस्ते .
आज यह आखिरी बार है जो
मिल रहे हैं...यहाँ.
इसके बाद से दोनों अपनी -अपनी राह.

आधा एक घंटा नहीं बीतने पाता
और दिल निकल पड़ता है फिर उसी रस्ते
जहां बिछड़े थे अभी ...कभी न मिलने की बात करके .
बीच रास्ते ..मन में आता है..पहले मैं ही क्यूँ?
फिर खुद को खुद ही समझा लेते हैं
क्या फर्क पड़ता है...कौन पहले बोले...
मुझमें उसमें कोई फर्क है क्या?

पहुँचो उस जगह तो दूसरा जना
खडा हुआ होता है पहले ही ...
प्यार में ....आखिरी बार जैसा
कुछ होता है क्या?

Saturday, November 5, 2011

पास रहना




तुम खफा हो जाते हो
मेरी गलतियों पर..
अक्सर, मेरी बेवाकूफियों पर
अपनी नाराज़गी भी जतलाते हो .
तुम खूब नाराज़ हो..खफा हो
मुझे कोई दिक्कत न कभी हुई है न होगी
मुझे पता है ,मैं तुम्हें मना लूंगी .

जो कभी यूँ हुआ
कि
तुम नहीं माने...
तो ,
सज़ा देना ....
मैं,हर सज़ा मानने को सहर्ष तैयार रहूंगी
बस...
मुझे छोड़ के दूर ना जाना
सामने रहना,पास रहना..........
और फिर चाहें कोई भी सज़ा दे देना .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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