Saturday, September 5, 2015

शिक्षक दिवस

वही कुछ सीख पाया है
जिसने सीखना चाहा है

माँ बाप यार दोस्तों ने
कुछ न कुछ सिखाया है

हर तजुर्बा खुद बेमिसाल
जिसने जीना बताया है

हर सबक सीख लेगा वो
उस्ताद उसका सरमाया है

हादसों औ ज़ख्मों तक ने
तरबीयत* को अपनाया है

*teaching

सीखने सिखाने वालों को आज के दिन की मुबारकबाद!!

Tuesday, September 1, 2015

ख़्वाब हो तुम

क्या था वो
सुबह को तो
याद नहीं रहता जो
बस होता रहता है
इक अच्छा सा एहसास
कि जो देखा वो था ख़ास
उस ख़्वाब सरीखे हो तुम

ख़्वाब हो तुम वही बने रहना
खूबसूरत  प्यास बने रहना
ख़्वाबों का होना ज़रूरी है
बताते हैं ये
कितनी तमन्नायें अधूरी हैं

काली रातों की नाउम्मीदी में
तुमसे आस का सवेरा झांकता है
तुम्हें सच करने की कोशिश में
पा लेने की उम्मीद पे
कोई अपने दिन रात काटता है

Monday, August 31, 2015

उम्मीद

तू मुझसे रूठा
तेरा साथ छूटा 
ज़िन्दगी वीरान
ख़ुशी न मुस्कान
कहीं से कोई ख़बर आती नहीं
तुम तक कोई डगर जाती नहीं

तेरे सिवा ...
न कोई था न कोई और है
कहूँ क्या....
नाउम्मीदी का एक दौर है

तेरी बातें तेरी यादें 
ढाँढस बंधाती हैं
मेरी आस का चिराग़
दिन रात जलाती हैं 
कहीं कोई तो चिंगारी 
है अब तक बाकी 
जो सुलगती और जलाती है 
नाउम्मीदी के इस दौर में भी
उम्मीद मरने नहीं पाती है

Sunday, August 30, 2015

ध्यान से सुनना तुम


इसे फुसला लेना तुम
यूँ ही बहक जाएगा
बुद्धु है दिल मेरा
इक इशारा करना तुम
साथ तुम्हारे चल देगा
है पागल मनचला
आवाज़ जो दोगे तुम
हर हाल चला आएगा
कि ज़िद्दी बड़ा
कोई इम्तिहाँ हो तैयार ये
जब जैसे चाहे आज़माना
मन मेरा ... सरफिरा

कान नहीं देते हो
मेरी किसी बात पे
पर इस बात को
ध्यान से सुनना तुम
क़सम से ये जी जायेगा
कि प्यार निभाना तुम
तेरे बिन कहीं न जाएगा
इसका ठौर ठिकाना तुम

Friday, August 28, 2015

सुनो न

यार सुनो न
एक बात कहनी है
वो जो अपने होठों पे
तुमने मुस्कान पहनी है
वो यूँ ही सजाये रखना
मैंने,
तेरे हिस्से के सारे आंसू
मांग लिए हैं रब से
एवज में दे दी हैं
अपने हिस्से की
सारी खुशियाँ और हंसी।
शर्त सिर्फ इतनी सी
दिन हो या रात हो
कैसे भी हालात हों
यूँ ही आसपास रहना
मेरे संग साथ रहना
सदा

Thursday, August 27, 2015

यायावर

यायावर हूँ
घुमक्कड़ी...काम मेरा
बेमतलब इधर उधर भटकते रहना
बिन काम के यहाँ वहाँ फिरते रहना
तेरे दिल के सिवा न घर न मकाँ मेरा

तुमसे छूटा तो फिर कहीं बंध न सका
ज़िन्दगी में इक ठौर कभी रुक न सका
भागता रहा हमेशा कहीं थम न सका
कोई चीज़ कोई बंधन मुझे कस न सका

प्यार खोया और मैं उसे ढूंढता रह गया
वो ख़त हूँ जिसका पता लापता हो गया
क्या करता यार
तेरे प्यार में पागल हुआ आवारा हो गया
तेरे दिल से निकला तो मैं बंजारा हो गया

Wednesday, August 26, 2015

तोहफे

तुम्हारी दी हुई चीज़ जब
दरकती टूटती ..
अटकती बिगड़ती ..
फिसलती छिटकती है
तो ,पता नहीं क्यों
उसे हमारे रिश्ते से जोड़ के
देखने लग जाती हूँ
इतना कुछ खो चुकी हूँ पहले
कि अब कुछ भी खोने से डरती हूँ

तुमने जो कुछ मुझे दिया है
फिर वो चाहें
मोहब्बत का एहसास हो
या ये भरोसा कि तुम पास हो
कई ख़त दुआओं से भरे हुए
या छोटे बड़े अनगिन तोहफे
अब  ,
जब कभी इनमें से
किसी को कुछ होता है
इक डर सताता है मुझे
सब बिखर जाने का

उसके बाद अक्सर मनाती रहती हूँ
मुहब्बत का कभी एक लम्हा न छूटे
तेरे प्यार पे जो है भरोसा वो न टूटे
दुआओं के ख़त में न देर हो कभी
चाहत का रंग फीका न पड़े कभी

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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