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Tuesday, September 1, 2015

ख़्वाब हो तुम

क्या था वो
सुबह को तो
याद नहीं रहता जो
बस होता रहता है
इक अच्छा सा एहसास
कि जो देखा वो था ख़ास
उस ख़्वाब सरीखे हो तुम

ख़्वाब हो तुम वही बने रहना
खूबसूरत  प्यास बने रहना
ख़्वाबों का होना ज़रूरी है
बताते हैं ये
कितनी तमन्नायें अधूरी हैं

काली रातों की नाउम्मीदी में
तुमसे आस का सवेरा झांकता है
तुम्हें सच करने की कोशिश में
पा लेने की उम्मीद पे
कोई अपने दिन रात काटता है

Thursday, November 21, 2013

सर्दी की लम्बी रातें


गुलाबी सर्दियों का मौसम शुरू हो रहा है
फैला रही है ठण्ड धीरे धीरे अपने पाँव ..
कोहरे की चादर तान कर स्याह सर्द रात
लम्बी होती जा रही है ..
तुम्हें तो पता नहीं है
न ही होगा
क्यूँ हो जाती हैं लम्बी रातें .
यह सुनते ही
पता है मुझे ,तुम अभी के अभी
सारा विज्ञान,भूगोल समझाने लगोगे
पर..असली कारण
जो है एक राज़
तुमको बताती हूँ
मेरे करीब आओ तुम्हें
सब का सब समझाती हूँ .

जश्न हैं ..ये रातें
मुहब्बत की गर्माहट का
स्वीट नथिंग्स की फुसफुसाहट का
बाहों की कसमसाहट का
होठों की नरमाहट का
क्यूंकि
इनमें ही खिलते हैं
फ़ूल मुहब्बत के
बिखरती है खुश्बू
देह से देह तक
और अलसाया रहता है तन मन
सोचते नहीं थकता है
कि काश...
ज़रा और लम्बी होती रात
तो थोड़ा सा ज़्यादा
मिल जाता तुम्हारा साथ

Monday, November 26, 2012

सर्दी



गुलाबी सर्दियों की
ये सर्द सुबहें और रातें
साथ ले कर आती हैं
कितनी सारी यादें .

तेरी यादों की गर्माहट
जो धूप बन सहलाती है
वही शाम होते होते
मेरे गले लग कर
रोती हैं रात भर
और भोर होते ही
ओस लुटाती हैं.

Tuesday, July 24, 2012

क्या.....




बेजान चीज़ों को
जला कर
तोड़ कर
धो कर
फाड़ कर
फेंक कर
तुमने सोचा होगा
कि चलो,पीछा छुडा लोगे ,मुझसे .
सच कहना
कि क्या .........
जला पाओगे?
तोड़ पाओगे ?
मिटा पाओगे?
धो पाओगे?
फाड़ पाओगे ?
फेंक पाओगे?

मेरा अक्स ...
अपने दिल से
अपने ख़्वाबों से
अपनी सुबहों से
अपनी आँखों से
अपनी यादों से
अपनी बातों से
अपनी रातों से
अपने"वजूद" से .

तुम्हें अभी तक दरअसल पता ही नहीं चला है
कि फर्क नहीं है कोई "मैं" और "तुम" में
जब तक तुम हो
मैं रहूंगी तुम में .

Saturday, February 4, 2012

सारी रात...



सारी रात ...
तेरे आने का इंतज़ार .
मन पे कुहासे की परत चढ़ने लगी है
रात भी गहरी और काली होने लगी है
ठहरी हुई ओस की बूँदें बहने लगी हैं
निराशा से भारी इस रात में क्या करूँ?
तुझे याद करूँ?
मिलन के सपने बुनूं ?
या ..बस,तारे गिनूँ ?

Monday, January 16, 2012

जागो मेरे साथ ...



कितनी तन्हां रातें...
तेरे बिन गुजारी हैं.
आज.....
तुझे साथ पाके...
साँसों की सरगम पर ,
धडकनें गीत गा रही हैं .
मेरी उलझनें बढ़ा रहीं हैं .
तुम हो आगोश में..
कह रहे हो कि
बालों में उंगली फिराऊ
माथे को सहलाऊं
आँखों पे तुम्हारी
हल्का सा चुम्बन धरूं
दुलार करूँ ..लाड करूँ..प्यार करूँ
और सुला लूँ तुम्हें अपने काँधे पर .
जबकि,
मैं चाहती हूँ
कि तुम यूँ ही रहो मेरे कंधे पे सर रख के
बातें करें हम जी भर के
तुम जागो मेरे साथ
आज की सारी रात .

Friday, December 2, 2011

हरसिंगार




मैं,
आजकल............
रातों में ,
सोती नहीं हूँ .
तुम्हारे साथ ,तुम्हारे पास होती हूँ.
तुम्हें,पता है,न !
रात भर मिल कर......
हम ढेरों बातें करते हैं ...

सारी रात .....
सांसें चढती हैं,
धडकनें बढ़ती हैं .
हरसिंगार की कलियों को
जैसे फूलों में बदलते हैं .

सवेरा होते ही
बिस्तर छोड़ देती हूँ
देखती हूँ कि
तुम पास नहीं हो
नारंगी डंठल वाले
वो सफ़ेद फूल
ज़मीं पर बिखरे पड़े हैं
और ...मेरा बदन
खुशबू से महक रहा है .

Saturday, November 19, 2011

बीती रात


बीती रात
कुछ ऎसी बात हुई ..
बेमौसम बरसात हुई
सच है ..
मुझको खुशियाँ रास नहीं आती
जैसे ...
कुछ लोगों को रिश्ते रास नहीं आते
वो गरजना...वो बरसना मुझ पर
भिगो गया मेरा मन ...

बहुत फिसलन भरी हैं..
प्यार की रहगुज़र
संभालना ...खुद को
कहीं साथ छूट ना जाए
और बस मलाल रह जाए ...ताउम्र

Monday, November 7, 2011

बातें जो खत्म नहीं होतीं



आओ ...
एक बार फिर....
सारी रात गुज़ारे ...साथ -साथ
वक्त गुजरने का पता न चले..

ओस की बूंदों से अंजुरी भरें
भोर की पहली किरण हँसे
और कहे...
अभी भी जाग रहे हो...तुम दोनों
सोना नहीं है क्या ?
ऐसी कौन सी बातें हैं
जो कभी खत्म ही नहीं होती .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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