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Monday, January 16, 2012

जागो मेरे साथ ...



कितनी तन्हां रातें...
तेरे बिन गुजारी हैं.
आज.....
तुझे साथ पाके...
साँसों की सरगम पर ,
धडकनें गीत गा रही हैं .
मेरी उलझनें बढ़ा रहीं हैं .
तुम हो आगोश में..
कह रहे हो कि
बालों में उंगली फिराऊ
माथे को सहलाऊं
आँखों पे तुम्हारी
हल्का सा चुम्बन धरूं
दुलार करूँ ..लाड करूँ..प्यार करूँ
और सुला लूँ तुम्हें अपने काँधे पर .
जबकि,
मैं चाहती हूँ
कि तुम यूँ ही रहो मेरे कंधे पे सर रख के
बातें करें हम जी भर के
तुम जागो मेरे साथ
आज की सारी रात .

सुराग.....

मेरी राह के हमसफ़र ....

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